डलहोजी से लेकर टेक्सास तक की, मांगिए डिग्रियां झोपडी में रहने वाले इस शख्स से

May 14, 2016

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की डिग्री को लेकर देशभर में बवाल मचा हुआ है। आम आदमी पार्टी उनकी डिग्री को फर्जी बताकर दावा कर रही है कि उनके पास डिग्री है ही नही। तो क्या इस देश में अब शिक्षा से ज्यादा जरूरी डिग्री दिखानी हो गई है। शायद कारण भी यही है कि देशभर फर्जी डिग्रियां बांटने वाले फर्जी संस्थानों का धंधा अरबों का हो चला है। हालही में सरकार ने 21 ऐसी यूनिवर्सिटी को ब्लैकलिस्ट कर दिया जो फर्जी डिग्रियां बाँट रही थी। इन सबके बीच इस देश में एक शख्स ऐसा भी है जिसके पास मौजूद डिग्रियों की जानकारी सुनकर शायद हर कोई हैरान हो जायेंगे।

चौकाने वाली बात यह है कि आरबीआई गवर्नर तक को पढ़ाने वाले आलोक सागर ने अपनी शैक्षणिक योग्यता 32 साल में पहली बार बताई। आज तक अलोक सागर आदिवासियों के बीच गुमनाम ज़िन्दगी जी रहे थे। उन्होंने 1973 में आई. आई. टी., दिल्ली से एम टेक किया; 1977 में हयूस्टन यूनिवर्सिटी, टेक्सास, अमेरिका से शोध डिग्री ली, फिर, टेक्सास यूनिवर्सिटी से डेंटल ब्रांच में पोस्ट डॉक्टरेट और; समाजशास्त्र विभाग, डलहोजी यूनिवर्सिटी, कनाडा में फेलोशिप की। उन्होंने 1982 में दिल्ली आई आई टी में प्रोफेसर की नौकरी से त्याग पत्र दे दिया. उन्होंने वर्तमान आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन को भी पढाया ।
आलोक सागर जी बैतूल जिले में आदिवासी अधिकारों के लिए कई सालों से काम कर रहे हैं और छोटे से गाँव में झोपड़ी बना कर रहते है। उनकी डिग्री का रहस्य तब सामने आया जब एक घटना को लेकर पुलिस ने उन्हें संघर्ष से बाज न आने पर जेल में डाल देने की धमकी दे डाली।

एक न्यूज़ वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार आलोक सागर दिल्ली के रहने वाले है और पिछले 32 सालों से बैतूल और होशंगाबाद जिले के आदिवासी गाँव में गुमनामी कार्यकर्त्ता की जिन्दगी जी रह रहे हैं। जिसमें, 1990 से बैतूल जिले के एक ही छोटे से आदिवासी गाँव कोचामाऊ में रह रहे हैं।

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