विकास आगे बढ़ाएंगे, गुजरात को बनाएंगे मॉडल राज्य: विजय रूपानी

Aug 06, 2016

गुजरात के अगले मुख्यमंत्री चुने गए विजय रूपानी ने कहा कि वह ‘पूरे देश के लिए गुजरात को एक मॉडल राज्य बनाने का प्रयास करेंगे.’

मुख्यमंत्री पद के लिए अपने नाम का एलान होने के बाद रूपानी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा संसदीय बोर्ड का आभार व्यक्त किया.

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के साथ संवाददाता सम्मेलन में रूपानी ने कहा कि वह और उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल जिम्मेदारी के साथ ‘विकास की राजनीति’ को आगे बढ़ाएंगे.

गडकरी ने कहा कि रूपानी को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत और सर्वसम्मति से मुख्यमंत्री और नितिन पटेल को उप मुख्यमंत्री चुना गया.

उन्होंने कहा, ‘यहां आने के बाद मैंने पार्टी अध्यक्ष (अमित शाह) और आनंदीबेन पटेल से बात की. विजयभाई रूपानी के नाम पर फैसला सभी लोगों से चर्चा के बाद किया गया. आनंदीबेन पटेल के प्रस्ताव के अनुसार नितिन पटेल को उप मुख्यमंत्री चुना गया है.’

उधर, गुजरात में भाजपा सरकार के नेतृत्व में इस बदलाव को लेकर कटाक्ष करते हुए कांग्रेस ने कहा कि ‘डूबते हुए जहाज को चलाने के लिए तैयार होने के विजय रूपानी के साहस की सराहना की जानी चाहिए.’

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने ट्वीट किया, ‘गुजरात का मुख्यमंत्री बनने पर विजय रूपानी को बधाई. डूबते जहाज को चलाने के लिए तैयार होने के लिए उनकी सराहना की जानी चाहिए. उनको शुभकामनाएं.’

इस फैसले ने सबको चौंका दिया

शुक्रवार को चौंका देने वाले एक फैसले के तहत प्रदेश अध्यक्ष और अमित शाह के समर्थक विजय रूपानी, नितिन पटेल को पछाड़ते हुए गुजरात के नये मुख्यमंत्री चुने गए. वह आनंदीबेन पटेल के उत्तराधिकारी होंगे.

आनंदीबेन पटेल के इस्तीफे की पेशकश के बाद इस शीर्ष पद के लिए दौड़ में सबसे आगे बताये गए नितिन पटेल को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है. पहले उनके लिए अगले साल विधानसभा चुनाव में जा रहे गुजरात में यह शीर्ष पद पक्का समझा जा रहा था.

पार्टी के पर्यवेक्षक केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भाजपा विधायक दल की बैठक के बाद यह घोषणा की. विधायक दल ने रूपानी को अपना नेता चुना. रूपानी और नितिन पटेल के नामों का प्रस्ताव आनंदीबेन पटेल ने रखा और कई विधायकों ने उसका समर्थन किया.

रूपानी को मुख्यमंत्री और वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री नितिन पटेल को उपमुख्यमंत्री बनाने का फैसला व्यापक बातचीत के बाद किया गया. इस बातचीत में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और गडकरी शामिल हुए.

भाजपा विधायक दल की बैठक शाम चार बजे शुरू होनी थी लेकिन शीर्ष नेताओं के साथ बातचीत जारी रहने के कारण यह दो घंटे विलंब से प्रारंभ हुई. दिन में पहले नितिन पटेल के कार्यालय ने दावा किया था कि उनके नाम को भाजपा ने अंतिम रूप दे दिया है. आनंदीबेन पटेल के इस्तीफे के कारण मुख्यमंत्री का पद खाली हुआ है.

चर्चा में था नितिन पटेल का नाम, लेकिन…

नितिन पटेल ने राष्ट्रीय चैनलों को एक के बाद एक कई साक्षात्कार दिए और उन्होंने यह बताया कि गुजरात को कैसे आगे ले जाने की उनकी मंशा है खासकर तब जब यह राज्य पटेल आरक्षण आंदोलन और दलित आक्रोश जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है. यहां तक कि उनके आवास पर मिठाइयां भी बंटी एवं पूजा भी की गयी.

लेकिन गांधीनगर के बाहरी इलाके कोबा गांव में प्रदेश पार्टी मुख्यालय में शाम चार बजे अमित शाह के पहुंचने के बाद अगले दो घंटे में सम्मेलन कक्ष में, उनकी, गडकरी और सरोज पांडे की प्रदेश के शीर्ष नेताओं के साथ बैठक चली. शाह के बाद गडकरी और सरोज पांडे भी वहां पहुंचे थे.

इस बैठक में शाह, गडकरी, पांडे, आनंदीबेन पटेल, नितिन पटेल, विजय रूपानी, भाजपा संयुक्त महासचिव (संगठन) वी सतीश मौजूद थे. कुछ अन्य नेता भी वहां थे. वैसे इस बैठक में क्या बातचीत हुई, उस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.

अमित शाह के करीबी माने जाते हैं रूपानी

जैन बनिया समाज से संबद्ध रूपानी अमित शाह के करीबी माने जाते हैं जबकि नितिन पटेल आनंदीबेन पटेल के नजदीकी बताये जाते हैं.

राजकोट पश्चिम सीट का प्रतिनिधित्व करने वाले रूपानी 1971 में जनसंघ से जुड़े थे और वह भाजपा से उसकी स्थापना के समय से ही जुड़े हैं. उनके पास फिलहाल परिवहन, जलापूर्ति, श्रम एवं रोजगार विभाग है.

रूपानी की उम्मीदवारी को दलित और पाटीदार समुदायों के बीच किसी भी टकराव को टालने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है. पाटीदार समुदाय ओबीसी आरक्षण की अपनी मांग को लेकर सरकार के साथ दो दो हाथ कर चुका है.

रूपानी को राज्य में भाजपा की अगुवाई का जिम्मा सौंपा जा रहा है जहां विधानसभा चुनाव में पार्टी का काफी कुछ दांव पर लगा है क्योंकि पार्टी अपने राजनीतिक आधार को बचाए रखने के लिए जद्दोजेहद कर रही है और उसके पास नरेंद्र मोदी जैसे करिश्माई नेता का अभाव है. केंद्र में जाने से पहले बतौर मुख्यमंत्री मोदी की राज्य पर गहरी पकड़ थी.

पिछले दो दशकों से एक के बाद एक कर चुनाव जीत रही भाजपा को ऐसा लगता है कि आनंदीबेन को बनाए रखने में राजनीतिक नुकसान का आभास हो गया है. उन्होंने मोदी की उत्तराधिकारी के रूप में 2014 में सत्ता की कमान संभाली थी.

आनंदीबेन पटेल ने बुधवार को राज्यपाल ओ पी कोहली को अपना इस्तीफा सौंपा था. वह इस साल नवंबर में 75 साल की हो जाएंगी.

उनके नेतृत्व में भाजपा को पिछले साल नगर निकाय चुनाव में शिकस्त मिली थी, विपक्षी दल कांग्रेस भगवा प्रतिद्वंद्वी की कीमत पर लाभ की स्थिति में रहा था.

पिछले दो साल से भाजपा अपने निष्ठावान वोटबैंक पाटीदारों के साथ टकराव में रही है. पाटीदार ओबीसी आरक्षण की मांग कर रहे हैं और उसने हिंसक प्रदर्शन भी किए.

हाल ही में उना में दलितों की पिटाई से राज्य में अशांति फैली तथा पार्टी की छवि को और नुकसान हुआ.

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