तनाव को दूर भगायें, हंसे और हंसाएं

Jul 22, 2016

हंसना मानव का अद्भुत मानवीय गुण है। पशु-पक्षियों में यह गुण देखने को नहीं मिलता। हंसने से शरीर हल्का तथा मन प्रफुल्लित रहता है, समाज में प्रेम, आत्मीयता, सद्भाव और प्रसन्नता का संचार होता है बशर्ते आपकी हंसी सरल एवं स्वाभाविक होनी चाहिए। इस बात ध्यान रखें कि किसी व्यक्ति की शारीरिक, मानसिक और आर्थिक कमजोरी को लक्ष्य बनाकर न हंसे। तनाव से मुक्ति: आज के भाई भतीजावाद, भ्रष्टाचार, हिंसा और महंगाई के युग में मनुष्य खुद को तनावों से घिरा हुआ पाता है। फलतः वह हृदय रोग, माइग्रेन, अनिद्रा, उच्च रक्तचाप जैसे खतरनाक रोगों का शिकार हो जाता है। अतएव जीवन को तनावमुक्त रखने एवं रोगों से बचने के लिये हंसने में कंजूसी न करें। जब आपका बच्चा कार्टून फिल्म या चुटकुला पढ़कर हंसता है तो उसे डांटें नहीं। हंसमुख एवं प्रश्नचित बच्चों का मानसिक विकास कुढ़ते, चिड़चिड़े एवं गुमसुम रहने वाले बच्चों की अपेक्षा ज्यादा होता है। जब आप शाम को काम कर घर लौटते हैं तब आपका मन बोझिल एवं शरीर थका रहता है। आपको चाहिए कि दफ्तर की सभी उलझनें एवं चिंता को वहीं छोड़ दें। शाम के वक्त आप घर पर बिताना चाहें या क्लब या पार्क में, आप जहां भी रहें, खुशमिजाज आदमी बनकर रहें। बच्चों, पत्नी और दोस्तों से चुटकले सुनें और खुद कहें। दिल खोलकर हंसे और हंसाएं। तब आप महसूस करेंगे कि आपका शरीर और मन हंसी की आनंदमयी फुहार से कितना तरोताजा हो जाता है। बहुत से व्यक्ति आवश्यकता से अधिक गंभीर नजर आते हैं। उन्हें देखकर लगता है कि जैसे वे हंसना भूल ही गए हैं। वे छोटी-छोटी बातों को लेकर ज्यादा उत्तेजित हो जाते हैं जो झगड़े का कारण बन जाता है। ऐसे ही व्यक्ति ज्यादा तनावग्रस्त, चिड़चिड़े तथा रोगी होते हैं। इसके विपरीत स्वभाव वाले व्यक्ति छोटी-छोटी बातों को हंस कर नजर अंदाज कर देते हैं। वे जिंदगी में कठिन से कठिन परिस्थितियों का आसानी से सामना कर लेते हैं। इस संदर्भ में एक विद्वान का यह कथन बिल्कुल सत्य है हंसी वह ढाल है जिससे टकरा कर हर तनाव पीछे लौट जाता है। मांसपेशियों का व्यायाम: निर्मल और स्वाभाविक हंसी सेहत के लिए अच्छी दवा है। हंसने से मनुष्य तनावमुक्त रहता है साथ ही, शरीर के कुछ हिस्से मांसपेशियों, हृदय तथा विचार आदि का व्यायाम हो जाता है। हंसी से रक्त संचार और पाचन क्रिया ठीक होती है। फलतः चेहरा आभायुक्त और तेजमय हो जाता है। व्यक्तित्व में निखार:-जहां हंसना मनुष्य की स्वाभाविक क्रिया है वहीं एक निश्छल हंसी उसके व्यक्तित्व में निखार भी लाती है। हंसमुख व्यक्ति सदैव स्वस्थ तथा आकर्षक व्यक्तित्व का मालिक होता है। ऐसे व्यक्ति सबको पसंद आते हैं जबकि उदास तथा स्वभाव के चिड़चिड़े व्यक्ति से सभी खिंचे-खिंचे रहते हैं। इसलिए यदि आप आकर्षक व्यक्तित्व के मालिक बनना चाहते हैं तो अपने चेहरे से गंभीरता का जामा उतार कर अपने होठों पर मुस्कान सजाएं। तब आप देखेंगे कि आपके जीवन की नीरसता, तनाव और उदासी किस कदर उड़न छू हो जाती है। और आप कठोर से कठोर व्यक्ति से भी सरलता से काम निकलवा सकते हैं। रोगों का उपचार: अब हास्य से रोगों का उपचार भी होने लगा है। वैसे भी मरीजों को वही डाक्टर ज्यादा पसंद आते हैं जो गंभीर के बजाय हंसमुख हों। अमेरिका में हास्य चिकित्सा से रोगों का उपचार होना शुरू हो गया है। वहां के कुछ अस्पतालों में मरीजों को हंसी मजाक के वीडियो कैसेट दिखाये जाते हैं और मजेदार चुटकुले सुनाये जाते हैं। एक अंग्रेजी विद्वान ने कहा कहा है, किसी रोगी के पास दवाई के दो बोरियों से लदे गधे ले जाने से अच्छा एक हंसोड़ व्यक्ति ले जाना ज्यादा अच्छा है। यह भी सत्य है कि खुलकर हंसने से व्यक्ति दीर्घायु होता है। इसलिए आइए हम सब मिलकर जात-पात, ईष्या-द्वेष को त्याग कर एक ऐसी निर्मल हंसी हंसे जिसमें मानवता का संदेश छुपा हो।

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