पहले बाबरी मस्जिद गिराये जाने की सुनवाई हो, फिर मालिकाना हक़ की: जस्टिस लिब्रहान

Dec 04, 2017
पहले बाबरी मस्जिद गिराये जाने की सुनवाई हो, फिर मालिकाना हक़ की: जस्टिस लिब्रहान

बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले की जांच करने वाले लिब्राहन आयोग के अध्यक्ष जस्टिस मनमोहन सिंह लिब्राहन ने देश की सर्व्वोच अदालत से कहा है कि सुप्रीम कोर्ट को बाबरी मस्जिद के मालिकाना हक़ की सुनवाई से पहले उसकी शहादत से जुड़े मामले का निपटारा करना चाहिए, उसके बाद ही उसके मालिकाना हक पर फैसले की सुनवाई करनी चाहिए। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा मालिकाना हक वाले मुकदमे पर सुनवाई से बाबरी विध्वंस के केस पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। उनका ये बयान ऐसे वक्त में सामने आया है जब सुप्रीम कोर्ट 5 दिसंबर से रोज इस मामले पर सुनवाई करेगा।

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यहाँ उन्होंने मीडिया से बाबरी मस्जिद के बारे में बात करते हुए कहा कि ऐसा करने का क्या मतलब है? यदि यह फैसला आता है कि संपत्ति वक्फ की है, तो इससे एक पक्ष विध्वंस के दोषी के तौर पर देखा जाएगा। इस बारे में उन्होंने आगे बात करते हुए कहा अगर यह फैसला आता है कि यह हिंदुओं के हिस्से जाएगा तब अपनी संपत्ति को वापस पाने के लिए बाबरी विध्वंस को उचित मान लिया जाएगा। बाबरी विध्वंस लोगों के बीच में अभी भी मुद्दा बना हुआ है इसलिए इस पर निर्णय पहले करना चाहिए।

इस बारे में उन्होंने कहा कि अलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला जवाब नहीं है। क्योंकि सबसे पहले इस पर मालिकाना हक पर फैसला होना चाहिए था। लेकिन ऐसा हुआ नहीं बल्कि उन्होंने जमीन का बंटवारा कर दिया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस जमीन को तीन हिस्से में बांट दिया था। उस में से एक हिस्सा निर्मोही अखाड़ा, एक राम लल्ला जबकि एक हिस्सा वक्फ बोर्ड का बताया गया था।

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जस्टिस लिब्राहन ने इस बात पर भी जोर देते हुए कहा कि न्यायिक व्यवस्था में मुसलमानों के विश्वास को बहाल करना होगा। लेकिन समस्या यह है कि इस वक्त कोई भी संगठन नहीं है जो इस मुद्दे पर राज़ी हो।

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