एफडीआई का राष्ट्रीय हितों के साथ कोई समझौता नहीं: सीतारमण

Apr 06, 2016

ऑन लाइन कारोबार (ई. कॉमर्स) में शत प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) पर उठे विवाद के बीच केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि किसी भी क्षेत्र में एफडीआई की अनुमति देने के लिए राष्ट्रीय हितों के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा.

सीतारमण ने दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सरकार देश में नयी प्रौद्योगिकी और तकनीक लाना चाहती है और ढांचागत क्षेत्रों के लिए पूंजी आमंत्रित करती है लेकिन एफडीआई के लिए राष्ट्रीय हितों के साथ कोई समझौता नहीं होगा और छोटे कारोबारियों तथा स्वरोजगार के क्षेत्र का हर हालत में संरक्षण किया जाएगा.

उन्होंने कहा कि ई. कॉमर्स में शत प्रतिशत एफडीआई देने के मामले में भ्रम की स्थिति है. यह अनुमति एकल ब्रांड खुदरा कारोबार के समान होगी और इससे छोटे कारोबारियों को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा. उन्होंने कहा कि सरकार स्वरोजगार और छोटे कारोबारियों को बढ़ावा देना चाहती है और ऐसा कुछ नहीं करेगी जिससे उनके हित प्रभावित हों.

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ई. कॉमर्स में एफडीआई की अनुमति ‘बिजनेस टू बिजनेस’ के लिए होगी और खुदरा कारोबार को इससे भयभीत होने की जरुरत है. उन्होंने कहा कि छोटे कारोबारियों को इससे किसी तरह की प्रतिस्पर्धा का सामना नहीं करना पडेगा.

ई. कॉमर्स में शत प्रतिशत एफडीआई की अनुमति देने का छोटे कारोबारी पुरजोर विरोध कर रहे हैं. इनके संगठन अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ का कहना है कि ई. कॉमर्स में एफडीआई को अनुमति देने से असमान प्रतिस्पर्धा का वातावरण बनेगा. सरकार की संबंधित नीति में अनेक खामियां है जिसका फायदा उठा कर ई कॉमर्स कम्पनियां खुदरा कारोबार पर कब्जा करेंगी और छोटे कारोबारियों को अपने व्यापार से हाथ धोना पड़ेगा.

एक सवाल के जवाब में सीतारमण ने कहा कि ई. कॉमर्स की कंपनियों को नजर रखने के लिए फिलहाल कोई प्रणाली नहीं है लेकिन इसके लिए संबंधित मंत्रालय से बातचीत की जा रही है और इसका समाधान कर लिया जाएगा.

 

 

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