20 दिन से जमीन सत्याग्रह कर रहे किसान दीवाली पर आधे दफन होकर जारी रखा विरोध प्रदर्शन

Oct 21, 2017
20 दिन से जमीन सत्याग्रह कर रहे किसान दीवाली पर आधे दफन होकर जारी रखा विरोध प्रदर्शन

जेडीए की नींदड़ आवासीय योजना के विरोध में किसानों का आंदोलन जारी है। जो सरकारी भूमि के आंशिक रूप से गड्ढों में दफन कर अपनी भूमि के अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं, दिवाली के अवसर पर भी वो अपने विरोध के साथ जारी रहे।

बता दें कि किसानों ने दिवाली पर ‘समाधी सत्याग्रह’ नामक विरोध का अपना अनूठा रूप जारी रखा और न सिर्फ दीपावली पर दीये जलाकर विरोध स्थल को सजाया, बल्कि बड़ी आम सभा में पुरुषों और महिलाओं के समान, सरकार और जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) के खिलाफ खूब नारे भी लगाए। पूरी भीड़ ने सर्वसम्मति से चिल्लाते हुए कहा कि “हम हमारा हक मांगते, नहीं किसी से भीख मांगते।”

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पूरा मामला ये है कि जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) सीकर रोड स्थित नींदड़ गांव में 1350 बीघा जमीन पर आवासीय कॉलोनी ला रहा है। इसके लिए जेडीए ने 16 सितंबर को कॉलोनी का एंट्री गेट निकालने के लिए सीकर रोड की तरफ 15 जमीन का कब्जा लेते हुए सड़क बना दी थी। लेकिन दो दिन बाद अवाप्ति से प्रभावित लोग एकजुट होकर आंदोलन शुरू कर दिया और नई सड़क को ही खोद दिया। इसके बाद लगातार धरना- प्रदर्शन चल रहा है। लेकिन जेडीए ने पुलिस में सड़क खोदने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई। जहाँ अब तक करीब 500 बीघा जमीन पर जेडीए का मालिकाना हक हो गया है। जबकि 700 बीघा जमीन अब भी किसानों के पास ही है तथा इन लोगों ने मुआवजा भी नहीं लिया है।

जेडीए ने नोटिस जारी कर आवासीय स्कीम के एंट्री पॉइंट की 15 बीघा जमीन का मुआवजा देने के लिए दिए थे। लेकिन लोगों ने वहां गड्‌ढ़े खोद दिए। जेडीए ने इस मुआवजा को कोर्ट में जमा करवा दिया है। इसको लेकर किसानों का कहना है कि जेडीए 2010 की डीएलसी रेट दे रहा है। वहीं जिन लोगों को 25 फीसदी जमीन दे रहा है, उसका भी मनमाने तरीके से लाखों रुपए लीज मनी के ले रहा है। यह किसानों के सैकड़ों परिवारों के साथ अन्याय है, और इसी के खिलाफ किसान दो हफ्तों से अधिक समय से विरोध कर रहे हैं।

इसको लेकर इन किसानों की मांग है कि सर्वे के लिए समन्वय समिति गठित हो। समिति में जेडीए अफसर, जनप्रतिनिधि व संघर्ष समिति में प्रतिनिधि शामिल हो। इसके साथ-साथ उनका कहाँ है कि “एक ढाणी व कालोनी का दुबारा सर्वे हो। परिवार की न्यूनतम आवश्यकता रिपोर्ट बनाई जाए। मकान की स्थिति व नुकसान की रिपोर्ट तैयार हो। योजना से प्रभावितों की आर्थिक स्थिति का आंकलन तथा अवाप्ति से उनके जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव का आंकलन हो।”

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