राजनीतिक पार्टियों की नजर बिसहड़ा के बहाने सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और विधानसभा चुनावो पर

Jun 09, 2016

दिल्ली से सटे दादरी के बिसहड़ा गांव में पिछले दस दिनों से बदला हुआ माहौल साफ-साफ देखा जा सकता है. पिछले साल सितम्बर में गोमांस रखने के संदेह में गांव की भीड़ द्वारा मोहम्मद अखलाक को पीट-पीटकर मार डाला गया था. घटना के करीब नौ महीने बाद फिर इस गांव में तनाव की स्थिति है.

दरअसल, मथुरा के फोरेंसिक लैब रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि अखलाक के घर मिला मांस गौमांस ही था. तीन अक्टूबर 2015 को यह रिपोर्ट तैयार की गई थी.

लैब के सहायक निदेशक द्वारा तैयार यह रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेजी गई थी. इसके बाद कोर्ट ने पुलिस को रिपोर्ट कोर्ट में जमा करने का आदेश दिया था. अब बचाव पक्ष के वकीलों ने नियमानुसार नकल विभाग से यह रिपोर्ट हासिल कर ली है. रिपोर्ट में गोमांस या उसकी किसी प्रजाति के मांस की पुष्टि की गई है.

गोमांस की पुष्टि होने के बाद भाजपा और शिवसेना से जुड़े नेताओं के एक समूह ने उसी मंदिर में महापंचायत की है, जहां से लाउडस्पीकर पर अखलाक के घर में गोमांस रखे होने की बात फैलाई गई थी. उसके बाद उग्र भीड़ ने अखलाक के घर पर धावा बोल दिया था. हिंसा के बाद से डर कर गांव के तीन मुस्लिम परिवार अपना घर छोड़कर चले गए हैं. यहां रहने वाले मुसलमानों ने बताया कि वे भय के साये में जी रहे हैं.

हिंसा होने के डर से वे घर के बाहर बरामदे में ही सोते हैं. यहां रहने वाली शकीना बेगम का कहना है कि माहौल में बहुत तनाव फैल गया है. ये लोग गांव में पंचायत कर रहे हैं. पता नहीं क्या होने वाला है. बेहतर तो कुछ नहीं होने वाला है.

मोहम्मद इदरीस का कहना है कि वे घटनाओं को देख रहे हैं. उनका सैलून का व्यवसाय चौपट हो गया है. साम्प्रदायिक तनाव दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है. यहां रहने वाले अन्य मुस्लिमों से जब तनाव के बारे में पूछा गया तो सभी का यही जवाब था कि उन्हें डर सता रहा है.

ऐसा नहीं है कि पंचायत सिर्फ बिसहड़ा गांव में ही हुई है. पास के अन्य गांवों में भी ऐसी ही पंचायतें लगती हैं जिसमें भाजपा के लोग शामिल होते हैं, सम्बोधित करते हैं और अपना समर्थन देते हैं. इसी तरह की एक पंचायत मंगलवार को सपनावत गांव में हुई जिसे एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने सम्बोधित किया और भरोसा दिया कि वे इसी 12 तारीख को जेल में अखलाक की हत्या करने वालों से मुलाकात करेंगे.

कट्टरपंथियों तत्वों की मांग है कि गोवध के आरोप में अखलाक के परिवार को गिरफ्तार किया जाए और उन लोगों पर लगे आरोप खत्म किए जाएं जिन्हें हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. इन लोगों ने अपनी मांगों को पूरा करने के लिए प्रशासन को 20 दिन का समय दिया है.

बताते हैं कि जिला प्रशासन को 20 दिन का समय देने की भी एक वजह है ताकि वे जमीनी स्तर पर अपनी तैयारी कर सकें और गांवों में महापंचायतें कर अपनी ताकत दिखा सकें. दूसरी वजह यह भी हो सकती है रमजान का महीना चल रहा है. रमजान की समाप्ति पर ईद पर मुस्लिम कुर्बानी देते हैं.

ऐसे में मात्र अफवाह फैलाकर साम्प्रदायिक तनाव फैलाया जा सकता है. ध्यान देने योग्य एक बात यह भी है कि ये पंचायतें वास्तव में पंचायतें नहीं है बल्कि एक वर्ग की बैठकें हैं. मुसलमानों को इन पंचायतों से दूर रखा जाता है और कट्टरपंथी विचारधारा के हिन्दू लोग ही इसमें भाग लेते हैं.

यह विश्वास करने के भी पर्याप्त कारण हैं कि पंचायतों का अपना प्रभाव है. स्थानीय लोगों के अनुसार बिसहड़ा के आसपास के गांव जैसे सपनावत, सामना, टकरना, ऊंचा अमीरपुर में पंचायतें हुईं हैं जिसमें लोगों को भावनाओं को भड़काया गया है.

बिसहड़ा के ग्राम प्रधान संजय राणा और उनके सहयोगी फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट के खुलासे पर कहते हैं कि उनके संदेह की पुष्टि हो गई है. राणा कहते हैं, ‘जब हम कहते थे कि अखलाक ने बछड़े का वध किया है तब कोई हमारी सुनता नहीं था. अब सच्चाई सामने आ गई है. लेकिन हमें मालुम है कि पुलिस कुछ नहीं करेगी. इसीलिए हमने अपनी मांगों को पूरा करने के लिए 20 दिन का वक्त दिया है.’

दूसरी ओर गोरक्षा हिन्दू दल के लोगों का कहना है कि 20 दिन की चेतावनी से हमारी कमजोरी ही दिखती है. गोरक्षा हिन्दू दल के वेद नागर कहते हैं कि हम दादरी में रैली निकालकर अखलाक के परिवार वालों को फांसी दिए जाने की मांग करेंगे.

ऐसे में दुखद है कि कोई भी राजनीतिक दल न तो हालात का प्रतिकार करने की कोशिश कर रहा है और न ही बदलने की. राज्य में चुनाव होने में एक साल से भी कम समय रह गया है. हालात किस करवट बैठेंगे, सिर्फ अनुमान लगाया जा सकता है.

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