गरीबों की थाली महंगी नहीं होने दूंगा: PM मोदी

Aug 16, 2016

देश सोमवार को 70वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है. इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीसरी बार दिल्ली के लाल किले से झंडा फहराया.

लाल किले की प्राचीर से अपने तीसरे स्वतंत्रता दिवस संबोधन में प्रधानमंत्री ने अपने भाषण के अधिकतर हिस्से में अपनी सरकार के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड पेश किया और खासतौर पर अर्थव्यवस्था की गति बढ़ाने में, कारोबार करना सुगम बनाने में और गरीबों तथा किसानों के लिए कल्याणकारी योजनाओं में सरकार के कार्यों का ब्योरा पेश किया.

महंगाई को काबू में रखने का संकल्प जताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने मुद्रास्फीति पर अंकुश लगाया है और उनका प्रयास है कि गरीबों की थाली महंगी न हो.

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार की तुलना में इस समय महंगाई कम हुई है. उन्होंने रिजर्व बैंक के साथ मौद्रिक नीति मसौदे के तहत अगले पांच साल के लिये दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत मुद्रास्फीत लक्ष्य का समर्थन किया.

मोदी ने कहा, ‘‘पूर्व सरकार के समय के दौरान मुद्रास्फीति 10 प्रतिशत से पार कर गयी थी. हमारे निरंतर प्रयासों से मुद्रास्फीति छह प्रतिशत से ऊपर नहीं गयी है.’’

प्रधानमंत्री ने माना कि इस समय सब्जियों की कीमतें कुछ चढ़ी हुई हैं. पर इसके कारण में जाते हुए उन्होंने इस तेजी के लिये लगातार दो साल सूखे को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि सूखे के कारण आपूर्ति प्रभावित होने से सब्जी की कीमतों में कुछ तेजी आयी है लेकिन इसे काबू में रखने के लिये प्रयास किये गये हैं.

उन्होंने कहा, ‘‘मैं निरंतर यह प्रयास करूंगा कि गरीबों की थाली महंगी नहीं हो.’’

इस साल दाल की कीमतों में तेजी का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस वर्ष दलहन की बुवाई 1.5 गुना हुई है और अच्छे मानसून तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तथा किसानों को बोनस जैसे कदमों के साथ-साथ उपलब्धता बढ़ने से कीमत के मोर्चे पर हालात बेहतर होंगे.

उन्होंने कहा कि इस साल मानसून बेहतर रहा है लेकिन कुछ जगहों पर अत्यधिक बारिश से समस्या उत्पन्न हुई है. उन्होंने कहा कि भारत सरकार बाढ़ से प्रभावित राज्यों को मदद करने के लिये पूरी तरह प्रतिबद्ध है.

मोदी ने कहा कि पिछली सरकारों के विपरीत उन्होंने लोकलुभावन उपायों से अपने को दूर रखा है और लोगों को अधिकार सम्पन्न बनाने के उपायों पर भरोसा किया है.

बीपीएल परिवारों की स्वास्थ्य सेवा का खर्च उठाएगी सरकार

महंगी स्वास्थ्य सेवाओं को गरीबों की जेबें खाली करने वाला बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की कि सरकार गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले परिवारों की स्वास्थ्य सेवा पर आने वाले एक लाख रूपए तक के वार्षिक खर्च का वहन करेगी.

प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी गरीब परिवार का कोई सदस्य जब बीमार पड़ता है तो उस घर की पूरी अर्थव्यवस्था हिल जाती है. यह योजना इस बात को सुनिश्चित करेगी कि ऐसे परिवार स्वास्थ्य सेवा के लाभों से वंचित न रहे.

मोदी ने कहा, ‘‘किसी एक के बीमार हो जाने पर गरीब घर की अर्थव्यवस्था हिल जाती है. उनकी बेटियों की शादी रूक जाती है, बच्चों की पढ़ाई रूक जाती है और कई बार तो भोजन भी उपलब्ध नहीं होता. स्वास्थ्य सेवा महंगी हो रही है.’’

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए सरकार गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों के लिए एक अहम योजना लेकर आई है. भविष्य में, यदि ऐसे परिवारों को चिकित्सीय सेवाएं लेनी पड़ती हैं तो सरकार एक साल में एक लाख रूपए तक का खर्च उठाएगी..ताकि मेरे गरीब भाई स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित न रहें और उनके सपने टूटें नहीं.’’

संवेदना को शासन के पीछे का मूल मंत्र बताते हुए मोदी ने कहा कि उनकी सरकार बड़े सरकारी अस्पतालों में ऑनलाइन पंजीकरण और डॉक्टरों की नियुक्ति करवाने में समर्थ हो सकी. उन्होंने कहा कि मरीजों के चिकित्सीय रिकॉर्ड भी ऑनलाइन उपलब्ध हैं.

मोदी ने कहा, ‘‘एक समय था, जब किसी को बड़े अस्पताल में जाने के लिए कई दिन तक इंतजार करना पड़ता था. लोग एम्स आते थे और मरीज की जांच का फैसला लिए जाने से पहले वहां दो-तीन दिन बिताते थे.’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम इस व्यवस्था को बदल पाए हैं. ऑनलाइन पंजीकरण और डॉक्टरों के ऑनलाइन अपॉइंटमेंट उपलब्ध हैं. उनका (मरीज का) चिकित्सीय रिकॉर्ड भी ऑनलाइन उपलब्ध है.’’
उन्होंने कहा, ‘‘स्वास्थ्य क्षेत्र में, हम इसे देशव्यापी संस्कृति के तौर पर विकसित करना चाहते हैं. हमने देशभर के 40 से ज्यादा बड़े अस्पतालों में यह व्यवस्था शुरू की है. लेकिन इसके पीछे का मूल मंत्र यह है कि शासन को ‘जनता की जरूरतों के प्रति’ संवेदनशील होना चाहिए.’’

आतंकवादियों के महिमामंडन पर पाक को लिया आड़े हाथ

आतंकवादियों को महिमामंडित करने के लिए पाकिस्तान को आड़े हाथ लेते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को ऐलान किया कि देश आतंकवाद के सामने नहीं झुकेगा.

उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की जनता ने अपने खिलाफ हो रहे अत्याचार के मुद्दों को उठाने के लिए उनका शुक्रिया अदा किया है.

100 मिनट के अपने भाषण में प्रधानमंत्री कश्मीर घाटी के हालात पर कुछ नहीं बोले जहां हिज्बुल कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद हिंसा का माहौल है लेकिन उन्होंने पाकिस्तान पर आतंकवादियों को महिमामंडित करने और भारत में लोगों के मारे जाने की खुशी मनाने का आरोप लगाया.

मोदी ने वानी का नाम नहीं लिया लेकिन जाहिर तौर पर ऐसा बोलकर उन्होंने उसी का जिक्र किया जिसे पाकिस्तान ने शहीद का दर्जा दिया.

हथियार उठाने वाले युवाओं से मुख्यधारा में आने की अपील

जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर, और नक्सल प्रभावित इलाकों में हिंसा के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हथियार उठाने वाले युवाओं का आह्वान किया कि वे अपने घरों को लौट आएं और मुख्यधारा में शामिल हों क्योंकि हिंसा के रास्ते से कभी किसी को फायदा नहीं हुआ.

मोदी ने कहा कि हिंसा से किसी का भला नहीं होने वाला है और निर्दोष लोगों की हत्या का ‘खेल’ खेला जा रहा है.

उन्होंने कहा, ‘‘आज माओवाद के कब्जे वाले जंगलों में निर्दोष लोगों की हत्या का खेल खेला जा रहा है, सीमा पर आतंकवाद के नाम पर खेल खेला जा रहा है, पहाड़ों में आतंक के नाम पर खेल खेला जा रहा है.’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि इन वर्षों में यह हुआ है कि मातृभूमि रक्त से लाल हो गई लेकिन आतंकवाद की राह पकड़ने वालों को कुछ हासिल नहीं हुआ.

मोदी ने कहा, ‘‘मैं उन युवाओं से कहना चाहता हूं कि यह देश हिंसा कभी बर्दाश्त नहीं करेगा. यह देश आतंकवाद कभी बर्दाश्त नहीं करेगा. यह देश कभी आतंकवाद और माओवाद के सामने सिर नहीं झुकाएगा.’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैं उन युवकों से कहना चाह रहा हूं कि अब भी समय है, वापस आ जाओ और अपने माता-पिता के सपनों को देखो. अपने माता-पिता के अकांक्षाओं को देखो. शांति का जीवन जियो क्योंकि हिंसा के रास्ते से कभी कोई फायदा नहीं हुआ.’’

प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि देश में हिंसा और अत्याचार के लिए कोई स्थान नहीं है.

उन्होंने कहा, ‘‘अगर भारतीय लोकतंत्र को मजबूत होना है, अगर भारत के सपनों को पूरा होना है, तो हिंसा कभी हमारा मार्ग नहीं होगा.’’

सामाजिक बुराइयों से कठोरता से निपटे जाने की जरूरत

दलितों और अल्पसंख्यकों पर हालिया हमलों के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सामाजिक बुराइयों से ‘कठोरता’ और ‘संवेदनशीलता’ से निपटे जाने की आवश्यकता है क्योंकि सामाजिक एकता के बिना समाज का जीवित रहना असंभव है.

मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अपने संबोधन में लालकिले की प्राचीर से कहा कि समाज की मजबूती का आधार सामाजिक न्याय है और आर्थिक वृद्धि समाज के सशक्त होने की कोई गारंटी नहीं है.

उन्होंने देशवासियों से सामाजिक समानता और न्याय के लिए काम करने को कहा.

मोदी ने स्पष्ट किया कि सामाजिक सौहार्द देश की प्रगति की चाबी है और महात्मा गांधी तथा बीआर अंबेडकर जैसे सभी संतों तथा हस्तियों ने हर किसी के साथ समान व्यवहार किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया था.

उन्होंने कहा, ‘‘आज हम सामाजिक तनाव देखते हैं. संत रामानुजाचार्य ने क्या संदेश दिया था ? उन्होंने कहा था कि हमें भगवान के सभी भक्तों की किसी पूर्वाग्रह के बिना समान रूप से सेवा करनी चाहिए. किसी का भी उसकी जाति की वजह से अनादर मत करिए.’’

मोदी ने कहा, ‘‘भगवान बुद्ध, महात्मा गांधी, संत रामानुजाचार्य, बीआर अंबेडकर ने जो कहा था, हमारे सभी शास्त्रों, संतों और शिक्षकों ने सामाजिक एकता पर जोर दिया है. जब समाज टूटता है तो साम्राज्य विघटित होता है. जब समाज स्पृश्य और अस्पृश्य, ऊंची और नीची (जातियों) में बांटता है तब ऐसा समाज नहीं ठहर सकता.’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘होता है, चलता है’ की मनोवृत्ति से सामाजिक बुराइयों से निपटने में मदद नहीं मिलेगी.

उन्होंने कहा, ‘‘ये बुराइयां सदियों पुरानी हैं तथा इनसे कठोरता और संवेदनशीलता से निपटना होगा.’’

अन्य ख़बरों से लगातार अपडेट रहने के लिए हमारे Facebook पेज को Join करे

लाइक करें:-
कमेंट करें :-
 

संबंधित ख़बरें

वायरल वीडियो

और पढ़ें >>

मनोरंजन

और पढ़ें >>
और पढ़ें >>