ईवीएम मुद्दा : बसपा की याचिका पर केंद्र, निर्वाचन आयोग को नोटिस

Apr 14, 2017
ईवीएम मुद्दा : बसपा की याचिका पर केंद्र, निर्वाचन आयोग को नोटिस

सर्वोच्च न्यायालय ने चुनावों में वोटर वेरिएबल पेपर ट्रेल (वीवीपीएटी) के साथ इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के इस्तेमाल को लेकर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की ओर से दायर याचिका पर गुरुवार को केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किया। बसपा ने अपनी याचिका में कहा है कि चुनावों में सर्वोच्च न्यायालय के 2013 के दिशानिर्देश के अनुरूप मतदान के लिए ईवीएम के साथ वीवीपीएटी का इस्तेमाल होना चाहिए।

न्यायमूर्ति जे.चेलामेश्वर और न्यायमूर्ति एस.अब्दुल नजीर की पीठ ने नोटिस जारी करते हुए कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को भी अपने ‘इंटरवेंशन’ आवेदन दायर करने की अनुमति दी।

शीर्ष अदालत ने हालांकि वीवीपीएटी के बिना ईवीएम से हुए चुनावों को रद्द करने की याचिका खारिज कर दी।

इस मामले में वरिष्ठ वकील पी.चिदंबरम बसपा की ओर से शीर्ष अदालत में पेश हुए।

न्यायालय से कहा गया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सहित सभी राजनीतिक पार्टियों ने कुछ बिंदुओं पर ईवीएम का विरोध किया है।

उन्होंने पीठ से कहा कि निर्वाचन आयोग के कई बार बताए जाने के बावजूद सरकार ने ईवीएम के साथ वीवीपीएटी लगाने के लिए धनराशि आवंटित नहीं की।

उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग ने वीवीपीएटी के लिए धनराशि जारी करने को लेकर केंद्र से 10 बार कहा।

न्यायालय को बताया गया कि पिछले साल केवल 10,000 ईवीएम ही वीवीपीएटी से जोड़े गए। अगर यही रफ्तार रही, तो तमाम ईवीएम को वीवीपीएटी के साथ जोड़ने में 150 वर्षो का समय लगेगा।

उन्होंने शीर्ष अदालत से यह भी कहा कि निर्वाचन आयोग ने इस मुद्दे पर सामान्य नियमों से परे हटकर सीधे प्रधानमंत्री को पत्र लिखा।

उन्होंने बताया कि ईवीएम के साथ वीवीपीएटी जोड़े जाने के लिए निर्वाचन आयोग को 3,000 करोड़ रुपये की जरूरत है, पर केंद्र सरकार यह धनराशि आवंटित नहीं कर रही है, इसके बजाय केंद्र ने मात्र 16 लाख रुपये की आवंटित की।

चिदंबरम ने पीठ को यह भी बताया कि दक्षिण अमेरिका के एक देश को छोड़कर विश्व के किसी भी देश में मतदान के लिए ईवीएम का इस्तेमाल नहीं होता।

इसके बाद, न्यायमूर्ति चेलामेश्वर ने कहा कि याचिका पर विचार करने के लिए न्यायालय के लिए यह कोई कारण नहीं हो सकता और वह मुद्दे को वरीयता के आधार पर देखेगा।

चिदंबरम ने अमेरिका के एक विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों के एक समूह की उस रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि ईवीएम से छेडछाड़ के जोखिम हैं और नतीजों में फेरबदल किया जा सकता है।

उन्होंने कहा, “ईवीएम की प्रौद्योगिकी में सुधार हुआ है, लेकिन विज्ञान में भी सुधार हुआ है और यह तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिसके साथ हमें अपनी रफ्तार बनाकर चलनी है।”

पीठ से कहा गया कि ईवीएम के हार्डवेयर तथा सॉफ्टवेयर दोनों से ही छेड़छाड़ संभव है और इसलिए सत्यापन तंत्र होना चाहिए।

चिदंबरम ने कहा, “प्रत्येक प्रौद्योगिकी की अपनी विशेषता होती है, लेकिन मतदान केंद्रों से जो परिणाम आए हैं, वह चौंकाने वाले हैं।”

उन्होंने कहा कि ईवीएम ने वोट को सही तरीके से रिकॉर्ड किया है या नहीं, इसका सत्यापन केवल वीवीपीएटी मशीन से ही किया जा सकता है।

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