एसेंस मिलाकर बना रहे सरसों का तेल, अफसरों ने कहा अब सरसों के तेल में मिलावट कहां- पढ़िए पूरी खबर

Jul 02, 2016

मुरैना। वाणिज्यकर विभाग ने पिछले 21 जून को शहर की एक बड़ी मिल पर छापामार कार्रवाई की थी। कार्रवाई के दौरान विभाग के अफसरों ने प्रथम दृष्टया तीन करोड़ की कर चोरी पकड़ी। खासबात यह रही कि मिल की जांच में सरसों की खरीद कम पाई गई, जबकि तेल का प्रोडक्शन अधिक हुआ। साथ ही तेल किनको और कहां-कहां बेचा गया, इस बात के दस्तावेज भी नहीं मिले। जब इस संबंध में वाणिज्यकर विभाग के डिप्टी कमिश्नर वीएस भदौरिया से बात की गई तो उन्होंने कहा कि कांडला पोर्ट ट्रस्ट से आने वाला सोयाकू्रड या अन्य तेल में एसेंस(केमिकल) की ब्लंडिंग(मिलाना) की जा रही है। जबकि ब्लंडिंग के लिए सरसों व एक अन्य तेल चाहिए। जब सरसों है ही नहीं है तो मिल संचालक ब्लंडिंग किस बात की कर रहे हैं। केवल सोयाक्रूड या अन्य तेल में सरसों के तेल का एसेंस मिलाकर ही सरसों के तेल के नाम पर बेच रहे हैं।

इसलिए नहीं है सरसों

इस बार अंचल में सरसों का उत्पादन बहुत कम हुआ है। सरसों का उत्पादन न होने से शहर की 80 फीसदी मिलें बंद हैं। ऐसे में जो मिल चालू हैं, उनके पास भी सरसों नहीं है और वे बाहर से सरसों मंगा भी नहीं रहे। इसके बावजूद सरसों के तेल का उत्पादन बदस्तूर जारी है। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरसों के कैसे तेल का उत्पादन हो रहा होगा।

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यह हैं ब्लंडिंग के नियम

ब्लंडिंग यानी दो तरह के तेलों की मिलावट करना, लेकिन इस नियम में यह लाइसेंस लेते समय बताना पड़ता है कि मिल संचालक कौन कौन से तेल को मिलाएंगे। इस मिलावट में कम से कम एक तेल की मात्रा 30 फीसदी होनी चाहिए। वहीं दूसरे तेल की मात्रा 70 फीसदी होनी चाहिए। पहले तेल मिल संचालक 30 प्रतिशत सरसों का तेल और 70 प्रतिशत में सोयाकू्रड, राइस ब्रान तेल को मिलाते थे। अब इस नियम की आड़ में मिल संचालक विदेशों से आयातित सोया क्रूड ऑयल में सरसों के तेल का एसेंस यानी एक केमिकल ही मिला रहे हैं। सरसों का तेल नहीं मिलाते। एसेंस से तेल में सरसों की झरप आ जाती है और लगता है वह सरसों का तेल है। बस इसी तेल को ब्लंडेड मस्टर्ड ऑयल लिखकर मिल संचालक जमकर सप्लाई कर रहे हैं।

यह होता है एसेंस

मिल संचालक एसेंस यानी एक तरह का केमिकल जो बिल्कुल सरसों के तेल की तरह सुगंध देता है और तीखा होता है। हालांकि मिल संचालक इस एसेंस या केमिकल का नाम नहीं बताते, लेकिन यह बताया जाता है कि यह काफी जहरीला होता है। सोयाक्रूड व राइस ब्रान में इसकी बहुत कम मात्रा ही मिलाई जाती है। जिससे इस तेल में सरसों की सुगंध आ जाती है।

इसलिए हो रहा ऐसा

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मिलावट पर अंकुश व जहरीले पदार्थों को खाद्य पदार्थों में मिलाने से रोकने का काम खाद्य औषधि विभाग का है, लेकिन पिछले सितंबर माह से शहर की किसी भी ऑयल मिल में खाद्य विभाग ने सैंपल लेने की कार्रवाई नहीं की है। वह भी ऐसी स्थिति में जब सरसों जिले में उपलब्ध नहीं है फिर मिल संचालक सरसों के तेल का उत्पादन कैसे कर रहे हैं। खाद्य एवं औषधि विभाग द्वारा सैंपल लेने की कार्रवाई न करने से मिल संचालक सोयाक्रूड व राइस ब्रान तेल में एसेंस मिलाकर बाहर भेज रहे हैं।

यह कर रहे मिल संचालक

– पहले तेल मिल संचालक अपने तेल को ब्रोकर के माध्यम से देशभर में सप्लाई करते थे, लेकिन जब से केवल एसेंस मिलाकर सरसों का तेल बना रहे हैं तब से वे ब्रोकर की जगह खुद ही डीलिंग कर रहे हैं, जिससे किसी को उनके काले कारोबार का पता न चले। इससे शहर के करीब आधा सैकड़ा ब्रोकर बेरोजगार हो गए हैं।

– तेल मिल संचालक टीनों में व टैंकरों को प्रदेश से बाहर इस तरह निकलवाते हैं कि यहां के वाणिज्यकर व खाद्य औषधि विभाग को पता ही नहीं चले।

ऐसे तेल का स्वास्थ्य पर असर

– एसेंस मिला हुआ तेल शरीर की किडनी सहित अन्य अंगों पर बुरा प्रभाव डालता है।

– इस तेल से हृदय रोग सहित कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों के होने का भी खतरा रहता है।

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– आंखों की रोशनी पर भी बुरा असर पड़ता है।

क्या कहते हैं वाणिज्यकर कमिश्नर

– मुरैना में चार-पांच फर्म कांडला पोर्ट ट्रस्ट से सोयाक्रूड व अन्य विदेशी तेल मंगा रही हैं। इन मिलों में से जिस मिल पर कार्रवाई की थी, उसमें सरसों का स्टाक या खरीदना भी बहुत कम मिला था। इससे तो यही लगता है कि जिले में सरसों के तेल का उत्पादन न के बराबर हो रहा है। जबकि सरसों तेल इन मिलों से बेचा जा रहा है। इससे साफ है कि विदेशी तेल में सरसों के तेल की ब्लंडिंग नहीं हो रही, बल्कि एसेंस या केमिकल ही मिलाकर उसे तैयार किया जा रहा है।

वीएस भदौरिया, डिप्टी कमिश्नर, वाणिज्यकर विभाग

क्या कहते हैं खाद्य सुरक्षा अधिकारी

– पिछले सितंबर माह में तेल मिलों से सैंपल लिए गए थे, उनमें से करीब चार मिलों के सैंपल फेल होकर आए थे। यह बात सही है कि जिले में सरसों नहीं है और ये मिलें सरसों के तेल का उत्पादन कैसे कर रही हैं। इन सब की जांच के लिए कलेक्टर ने निर्देश दिए हैं। जुलाई माह में तेल मिलों पर कार्रवाई की जाएगी और सैंपल लिए जाएंगे। तभी पता चलेगा कि तेल में ये लोग क्या मिला रहे हैं।

अवनीश गुप्ता, खाद्य सुरक्षा अधिकारी मुरैना

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