ईरान से अंतराष्ट्रीय प्रतिबंध समाप्त, सामने आए बहुत अधिक अवसर: PM मोदी

May 23, 2016

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ईरान पर से अंतराष्ट्रीय प्रतिबंध समाप्त होने से बहुत अधिक अवसर सामने आए हैं और भारत व्यापार, निवेश, बुनियादी ढांचे तथा ऊर्जा आदि क्षेत्रों में इस देश के साथ सहयोग बढाने की संभावनाएं देख रहा है.

मोदी ने दो दिवसीय ईरान यात्रा पर तेहरान पहुंचने से पहले ईरान की संवाद समिति इरना से बातचीत में कहा, ‘कठिन दौर में भी, भारत व ईरान ने हमेशा अपने संबंधों को नयी मजबूती देने पर ध्यान दिया है. मौजूदा परिदृश्य में दोनों देश व्यापार, प्रौद्योगिकी, निवेश, बुनियादी ढांचा व ऊर्जा सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में अपने सहयोग को बढाने पर विचार कर सकते हैं.’
उन्होंने कहा कि भारत की सार्वजनिक व निजी कंपनियां ईरान में निवेश की इच्छुक हैं. उन्होंने कहा कि चाबहार बंदरगाह के विकास के लिए समझौते पर हस्ताक्षर होने से व्यापक संपर्क (कनेक्टिविटी) की सुविधा बनेगी.
प्रधानमंत्री ने कहा कि ईरान के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के समाप्त होने से दोनों देशों के लिए विशेषकर आर्थिक मोर्चे पर सहयोग के असीमित अवसरों के द्वार खुले हैं.’ उन्होंने कहा कि भारत पारस की खाड़ी स्थित इस देश में अपना निवेश बढाना चाहता है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारत भी तेल सम्पन्न ईरान से अपने यहां पूंजी व निवेश का स्वागत करता है.
मोदी सोमवार को राष्ट्रपति हसन रूहानी के साथ औपचारिक वार्ता करेंगे. मोदी ने कहा कि पिछले साल उफा (रूस) में उन्होंने राष्ट्रपति रूहानी के साथ मुलाकात में बंदरगाह, उर्वरक व पेट्रोकेमिक्ल क्षेत्र में पारस्परिक सहयोग की संभावनाओं का संकेत दिया था.
उल्लेखनीय है कि सार्वजनिक क्षेत्र की ओएनजीसी ने 2008 में इस परियोजना क्षेत्र में गैस भंडारों का पता लगाया था और वह इसके विकास का अधिकार हासिल करने के लिए बात कर रही है. कंपनी इस परियोजना में लगभग 10 करोड़ डालर पहले ही निवेश कर चुकी है.’
ईरानी बंदरगाह चाबहार के विकास में भारत की भागीदारी की दिशा में अब तक हुई प्रगति पर संतोष जताते हुए मोदी ने कहा,‘ मुझे खुशी है कि चाबहार बंदरगाह तथा चाबहार से जुड़ी व्यापक संपर्क पर प्रगति हुई है.’
उन्होंने कहा,‘हमारी सार्वजनिक व निजी कंपनियां ईरान में निवेश की इच्छुक हैं. इसके साथ ही हम ईरान से पूंजी व निवेश का भी स्वागत करेंगे.’
शीर्ष ईरानी नेतृत्व के साथ अपनी बैठकों के एजेंडे के बारे में मोदी ने कहा,‘ ईरान हमारे विस्तारित पड़ोस का हिस्सा है, क्षेत्र का महत्वपूर्ण देश है और भारत के सबसे मूल्यवान भागीदारों में से एक है. हम साझी विरासत तथा सभ्यता संबंधों के जरिए एक दूसरे से जुड़े हैं.’
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि क्षेत्र की शांति, स्थिरता व संपन्नता में भारत के ‘साझा हित’ हैं. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद व चरमपंथी विचारधारों के खतरे से लड़ना दोनों देशों के लिए समान चुनौती है.
मोदी ने कहा,‘ क्षेत्रीय संपर्कता बढाने के लिए मजबूत कदम उठाना हमारे दोनों देशों के बीच बढते सहयोग का सबसे महत्वपूर्ण व आशाजनक आयाम है.’
उन्होंने कहा कि इसके अलावा उचित ऊर्जा भागीदारी बनाना, बुनियादी ढांचा क्षेत्र, बंदरगाह, रेलवे व पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में सहयोग बढाना तथा मौजूदा समय में आम लोगों के बीच संबंधों के जरिए सभ्यताकालीन संबंधों का विकास भी प्राथमिकता पर है.
उनकी ईरान यात्रा के दौरान होने वाले संभावित समझौतों के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा,‘ यात्रा के बारे में कोई पूर्व धारणा नहीं बनाएं. लेकिन हमें पूरा भरोसा है कि मेरी यात्रा से ऊर्जा, बुनियादी ढांचा, व्यापार, निवेश व संस्कृति के क्षेत्र  में टिकाऊ परिणाम सामने आएंगे.’
उन्होंने कहा,‘हमें हमारे संबंधों के इतिहास में एक नये अध्याय की शुरुआत… हमारे व्यापक रणनीकि भगीदारी में एक नये आयाम का पूरा भरोसा है.’
मोदी ने अपने साक्षात्कार में भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों तथा उसे पूरा करने के लिए ईरान की संभावना का भी जिक्र किया.
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