भ्रष्टाचार मामले में ईडी के पूर्व अधिकारी गिरफ्तार

Feb 21, 2017
भ्रष्टाचार मामले में ईडी के पूर्व अधिकारी गिरफ्तार

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने मंगलवार को प्र्वतन निदेशालय के पूर्व अधिकारी जे.पी.सिंह और तीन अन्य को हवाला के एक मामले एवं आईपीएल 2015-16 के सट्टेबाजी रैकट की जांच में रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया। पूर्व संयुक्त निदेशक जे.पी.सिंह के साथ तीन अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है, जिनमें ईडी के अधिकारी संजय कुमार तथा दो बिचौलिए विमल अग्रवाल तथा चंद्रेश पटेल शामिल हैं।

इन्हें सीबीआई द्वारा सितंबर 2015 से जांच किए जा रहे भ्रष्टाचार के एक मामले को लेकर गिरफ्तार किया गया। इसे वित्त मंत्रालय के निर्देश पर दर्ज किया गया था।

सीबीआई ने कहा कि सिंह और दूसरे ईडी अधिकारियों ने सूरत हवाला के एक मामले और इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) सट्टेबाजी रैकेट की जांच के दौरान आरोपियों से कथित रूप से भारी रिश्वत ली थी।

सीबीआई प्रवक्ता आर.के. गौर ने कहा, “एक बड़ी रिश्वत की राशि इन अधिकारियों द्वारा कई तरह के कार्यो को करने या न करने के बदले में ली गई थी।”

उन्होंने कहा कि गिरफ्तार किए गए व्यक्ति सीबीआई की हिरासत में दिल्ली में हैं। इन पर भ्रष्टाचार निरोधक कानून और आपराधिक साजिश रचने के तहत मामला दर्ज किया गया है।

भारतीय राजस्व सेवा अधिकारी सिंह के खिलाफ अहमदाबाद में ईडी के संयुक्त निदेशक रहने के दौरान मामला दर्ज किया गया था, संजय कुमार तब उनके अधीनस्थ थे।

इससे पहले सीबीआई ने मामले में तीन सट्टेबाजों को गिरफ्तार किया था। ये कथित तौर पर सिंह के लिए बिचौलिए का कार्य कर रहे थे।

इससे पहले एजेंसी ने अहमदाबाद की विशेष अदालत में खुफिया ब्यूरो (आईबी) रिपोर्ट के हवाले से कुछ दस्तावेज प्रस्तुत किए थे, जिसमें आरोप था कि सिंह ने कुछ आरोपियों को गिरफ्तार नहीं करने के लिए राशि ली थी।

आईबी रिपोर्ट के आधार पर सीबीआई ने मुंबई के सट्टेबाज विमल अग्रवाल और सोनू जालान का नाम। यह दोनों सिंह के लिए बिचौलिए का कार्य करते थे, जो सटोरियों से भारी राशि जमा करने का काम करते थे।

सीबीआई सूत्रों ने कहा कि जालान और अग्रवाल 2015 में कई बार दिल्ली आए। इन्होंने सट्टेबाज जे.के. अरोड़ा की मदद से कई दूसरे सट्टेबाजों से संपर्क किया, जिनके नाम आईपीएल सट्टेबाजी रैकेट में आए हैं।

जालान और अरोड़ा को सीबीआई ने बीते साल गिरफ्तार किया था। अदालत ने एजेंसी द्वारा उनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल करने में असफल रहने के कारण उनको जमानत दे दी थी।

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