दलितो पर अत्याचार के विरोध में जहर पीने वाले हेमंत भाई की मौत

Jul 20, 2016

गुजरात के उना में चार दलितों की पिटाई का मामला बढ़ता जा रहा है। खबर है कि अत्याचार के विरोध में जहर पीने की वजह से हेमंत भाई नाम के शख्स की मौत हो गई है। सोशल साइट्स पर इसको लेकर काफी लोगों में गुस्सा है। बहुजन समाज सड़क पर उतर गया है। शोसल साइट्स पर कई तरह की खबरें आ रही है।
दरअसल उना में दलितों पर हुए अत्याचार के विरोध में गोंडल में पांच युवकों ने खुलेआम जहर पिया। इस घटना से लोगों की भीड़ जमा हो गयी। पुलिस द्वारा विरोध से पहले ही कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गयी थी। पुलिस के प्रयास से पहले ही पांचों युवकों ने जहर पी लिया। राजकोट में भी दलितों भी भीड़ जमा होने लगी है।

जानकारी के अनुसार उना में दलितों पर अत्याचार के विरोध में गोंडल नगरपालिका के कांग्रेसी सदस्य अनिल के माधड, राजेश आर परमार, रमेश बीजलभाई पारघी, जगदीश जे राठोड और भरत बी सोलंकी ने जहर पीकर आत्महत्या करने की कोशिश की। पांचों युवकों को तुरंत 108 एंबुलेंस से उपचार हेतु सरकारी होस्पिटल ले जाया गया। लोगों की भीड़ ने होस्पिटल को घेर लिया। राजकोट में दलितों ने रैली निकालकर कलेक्टर को ज्ञापन दिया। उना में दलितों पर अत्याचार के विरोध में कल रैली निकाली गयी थी। जहर पीने वाले पांचों युवकों ने पांच दिन पहले ही आत्मविलोपन की धमकी दी थी। गोडल के खटारा स्टैंड के पास डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर की प्रतिमा के सामने सुबह से कडी सुरक्षा व्यवस्था की गयी थी।

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गुजरात को बंद करेंगे दलित
दलितों के एक संगठन ने कल गुजरात बंद का आह्वान किया है । जूनागढ़ में कल कई दलित युवाओं ने ज़हर पी लिया था , वे सरकार का विरोध कर रहे थे जिसकी ढिलाई से मरी गाय की खाल उतारते दलित युवकों को एक गौऱक्षक दल के गुंडों ने पीटा था !
जहर पीने से एक युवक की आज मौत हो गई और जूनागढ़ जाम !
प्रदीप कंधवाल

रोहित हम शर्मिंदा हैं
क्योंकि तेरे कातिल जिंदा हैं।
इस नारे के साथ पिछले दिनों पूरे देश में रोहित वेमुला के दोषियों को सजा दिलाने के लिये आंदोलन और धरना प्रदर्शन हमारे लोगों ने किये थे उसी प्रकार एक बार फिर पुरे देश में आंदोलन करने की जरूरत है।
क्योकि गुजरात में हमारे 6 लोगों ने जहर इस लिये पीया है की हमारे सोये हुए समाज को जगाया जाये।
हमारे लोग समाज के लिए जहर पीकर अपने प्राण न्योछावर कर रहे हैं ,अच्छी बात है की तुरंत ईलाज मिलने से उनकी जान बच गयी है ,क्या समाज के लिए अपनी जान की बाजी लगाने वाले अपने उन नोजवानों की क्रांति को पूरे देश में नहीं फैलाना चाहिए ?
शर्म करो मेरे समाज बंधुओ ,
लोग तो समाज के लिए मरने को तैयार हैं और मर रहे हैं ,लेकिन हम चुपचाप सब कुछ बर्दाश्त कर रहे हैं ।
नहीं, मेरे भाइयों आप ऐसा बिलकुल नहीं कर सकते हैं ,आपकी रगो में भी खून है, मुझे मालूम है की अब आप भी जरूर कुछ करेंगे।
जान लेना और जान देना यह मानवता और लोकतंत्र के लिये उचित नहीं है, इसलिए हम लोगों को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज को बुलन्द करना चाहिए।
हमारे 6 लोगों ने हमे जगाने के जहर पी डाला, अब उस जहर का असर हमे दिखाना होगा, जाति के आधार पर जुल्म करने वालों को सबक सिखाना होगा,
दोषियों को जेल की हवा खिलाना होगा, मनुवादी सरकारों को ठिकाने लगाना होगा, इसके लिये अपनी ताकत दिखाना होगा और सभी संगठनो को बेनर ,तख्तियां और झंडे लेकर सड़को पर आना होगा, अपने मन की पीड़ा को सरकारों तक पहुँचाने के लिए चिल्लाना होगा।
इसलिए साथियों अब जागो और दिखा दो अपनी ताकत।
गाँव हो या शहर जातिवादी जुल्मो से तंग आकर भविष्य में दुबारा न पिये कोई जहर और न कोई ढाये हमारे समाज पर कहर।

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