पर्यावरण की अनदेखी नहीं की है: श्री श्री रविशंकर

Mar 08, 2016

आर्ट ऑफ लिविंग के प्रणोता श्री श्री रविशंकर ने कहा कि उनकी संस्था ने 11 से 13 मार्च तक नई दिल्ली में यमुना किनारे आयोजित किए जा रहे विश्व सांस्कृतिक महोत्सव के लिए पर्यावरण के नियमों को उल्लंघन नहीं किया है.

              
श्री श्री रविशंकर ने संवाददाताओं से कहा कि इस महोत्सव के लिए एक भी पेड़ नहीं काटा गया है. उन्होंने कहा कि उनकी संस्था यमुना किनारे जैव विविधता पार्क बनाएगी. हम यमुना को साफ करना चाहते हैं और पर्यावरण के प्रति सतर्क हैं.
              
इस आयोजन के खिलाफ कुछ पर्यावरणविदों ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण में याचिकायें दायर की हैं जिन पर मंगलवार को भी सुनवाई हुई और बुधवार को फिर होगी. कार्यक्रम में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को भी हिस्सा लेना था लेकिन विवाद उठने के बाद उन्होंने इससे किनारा कर लिया है. इस कार्यक्रम में करीब 35 लाख लोगों के हिस्सा लेने की संभावना है.

इसके पहले दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण को बताया कि आर्ट ऑफ लीविंग फाउंडेशन की ओर से यमुना नदी के किनारे आयोजित किये जाने वाले विश्व संस्कृति महोत्सव को पुलिस और दमकल विभाग से मंजूरी नहीं मिली है.
                      
इस महोत्सव को 11 मार्च से शुरु होना है लेकिन पर्यावरण संबंधी नियमों के कथित उल्लंघन के कारण इसे लेकर विवाद पैदा हो गया है. यमुना जिये अभियान के कार्यकर्ताओं की ओर से इस महोत्सव के खिलाफ राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण में याचिका दाखिल की गई है.
                    
अदालत ने महोत्सव के लिए यमुना नदी के किनारे खड़े किए गए ढांचे को लेकर दिल्ली विकास प्राधिकरण की खिंचाई की थी.

दिल्ली सरकार ने मंगलवार को अदालत में बताया कि पुलिस और दमकल विभाग की एक टीम मौके का मुआयना करेगी और सुरक्षा मानकों का निरीक्षण करेगी.
             
श्री श्री रविशंकर ने दावा किया कि महोत्सव के लिए एक भी पेड़ को नहीं काटा गया है.
              
आध्यात्मिक गुरु ने कहा कि यमुना को फिर से स्वच्छ और शुद्ध बनाने का मुद्दा उनके दिल के बहुत करीब है और उनके पांच हजार स्वयंसेवियों ने नदी की सफाई में भाग लिया. उन्होंने वादा किया कि महोत्सव के बाद वह और उनकी टीम यमुना के मैदानी भाग को एक संपन्न जैव विविधता वाला पार्क बनाने के लिए हरसंभव प्रयास करेगी.

विश्व सांस्कृतिक महोत्सव पर छाये संशय के बादल

यमुना के बाढ़ के डूब वाले क्षेत्र में प्रस्तावित तीन दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम के सिलसिले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के तीखे सवाल करने के बाद उस पर संशय के बादल मंडराने लगे. पर्यावरणविद पहले से ही इस आयोजन के विरूद्ध हैं.
     
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने रविवार को इस कार्यक्रम के समापन समारोह में जाने से इनकार कर दिया है जिसके बाद ऐसी अटकलें लगने लगीं कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शरिवार को कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे या फिर नहीं.

     
आलोचना का सामना कर रहे आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के प्रमुख श्री श्री रविशंकर ने यह कहते हुए पारिस्थितिकी को कोई नुकसान पहुंचने के आरोपों से इनकार किया कि कोई पेड़ नहीं काटा गया और यह कि उनका संगठन इस क्षेत्र में जैवविविधता पार्क बनाएगा.
     
नये आतंकवादी खतरों के आलोक में सुरक्षा को लेकर चिंता के बीच गृह मंत्रालय ने दिल्ली पुलिस को इस आयोजन के दौरान शांति बनाए रखने और भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न होने से रोकने के लिए सभी संभावित कदम उठाने को कहा है.

अब सभी की आंखे राष्ट्रीय हरित अधिकरण की सुनवाई पर टिक गयीं जिसने केंद्र से सवाल किया कि इस महोत्सव के लिए यमुना के मैदान में ढांचे खड़ा करने के लिए पर्यावरण संबंधी अनापत्ति की जरूरत क्यों नहीं है.
     
एनजीटी अध्यक्ष स्वतंत्र कुमार की अगुवाई वाली पीठ ने कहा, ‘‘आप (पर्यावरण एवं वन मंत्रालय) बुधवार को हलफनामा दीजिए और बताइए कि पर्यावरण संबंधी अनापत्ति की बाढ़ के डूब वाले क्षेत्र में अस्थायी ढांचे खड़ा करने के लिए जरूरत क्यों नहीं है.’’
     
अधिकरण का यह निर्देश तब आया जब पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के वकील ने कहा कि जब विशेषज्ञ दल ने दौरा किया तब उसे उस स्थान पर कोई मलबा नहीं मिला और पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन अधिसूचना, 2006 के अनुसार अस्थायी ढांचे के लिए किसी पर्यावरण अनापत्ति की जरूरत नहीं पड़ती है.
     
हरित पैनल ने इस महोत्सव के लिए सेना द्वारा पंटून पुल बनाये जाने पर भी सवाल उठाया और दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के वकील से पूछा कि किसने इस पुल के निर्माण की इजाजत दी.
     
डीडीए, दिल्ली सरकार और पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने कहा कि उनका पंटून पुल के निर्माण के वास्ते इजाजत देने से कोई संबंध नहीं है.
     
एनजीटी ने कहा कि वह बुधवार को अपना आदेश सुनाएगा.
    
दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने इस कार्यक्रम के लिए सशर्त अनुमति दी है जबकि पुलिस एवं अग्निशमन विभाग से कोई इजाजत नहीं मिली है.
     
डीडीए ने कहा कि निर्माण गतिविधि पर रोक लगाने की मांग संबंधी याचिका उस स्थल पर गतिविधि शुरू हो जाने के बाद देर से दायर की गयी है अतएव उसे खारिज कर देने की जरूरत है.           

उसने कहा कि इस बात के लिए सतत निगरानी रखी जा रही है कि कोई मलबा या निगम का अपशिष्ट यमुना के बाढ़ के डूब वाले क्षेत्र में नहीं डाला जाए तथा यदि कोई मलबा डाल दिया जाता है तो उसे हटाने के लिए वहां ठेकेदार है.
     
पीठ ने कहा कि डीडीए बस यह कहकर अपना पल्ला नहीं झाड़ सकता कि वहां कोई मलबा नहीं है क्योंकि फोटो में तो उस जगह पर मलबा नजर आता है.
     
विभागों ने पंटून पुल को लेकर एक दूसरे पर जिम्मेदारी डाली. डीडीए ने कहा कि पुल के वास्ते उसे सिर्फ अनापत्ति प्रमाणपत्र देने की जरूरत होती है जबकि दिल्ली सरकार ने कहा कि पंटून पुल के लिए उसकी भूमिका बाढ़ के वक्त ही आती है. पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने जिम्मेदारी जल संसाधन मंत्रालय के ऊपर डाल दी.

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