एक्सीडेंट में घायल दो बुजुर्गों को देखा तो डीएम ने अपनी गाड़ी से भेजा अस्पताल, खुद रिक्शे से पहुंचे ऑफिस

Oct 28, 2016
एक्सीडेंट में घायल दो बुजुर्गों को देखा तो डीएम ने अपनी गाड़ी से भेजा अस्पताल, खुद रिक्शे से पहुंचे ऑफिस
नौकरशाही जब संवेदनशीलता दिखाती है तो हर तरफ से सराहना के स्वर गूंजने लगते हैं। अब धर्मनगरी वाराणसी के डीएम योगेश्वर राम मिश्रा को ही लीजिए। मातहतों के साथ शहर की रियलिटी चेक करने निकले थे, रास्ते में दो सीनियर सिटिजन को एक्सीडेंट में घायल होकर तड़पते देखा। अपनी गाड़ी से दोनों को तत्काल अस्पताल भेजा और फिर कोई दूसरी गाड़ी न बुलाकर खुद रिक्शे से पैदल दफ्तर पहुंचे। एक आईएएस अफसर  और बड़े जिले के डीएम के इस कदम की सराहना करते लोग नहीं थक रहे हैं।
सीएमओ से कहा मुफ्त और बेहतर इलाज में कोई चूक नहीं
दरअसल डीएम योगेश्वर राम मिश्र दीवाली के मद्देनजर शहर की सूरतेहाल देखने निकले थे। दशाश्वमेघ घाट की ओर से रथयात्रा मार्ग से लौट रहे थे। अचानक नजर सड़क किनारे घायल होकर तड़पते एक वृद्ध दंपती पर पड़ी। नजर फेरकर फोन से पुलिस को सूचना देकर दनदनाने निकल जाने की कर्तव्य की इतिश्री के बजाए डीएम ने तुरंत नीली बत्ती की अपनी कार रुकवा दी। दंपती को गाड़ी में बैठवाया। इसके बाद स्टेनो और गार्ड को अस्पताल लेकर भर्ती कराने को कहा। इसके बाद सीएमओ को फोन कर कहा कि बुजुर्ग दंपती का मुफ्त और बेहतर इलाज होना चाहिए। किसी भी तरह की लापरवाही हुई तो खैर नहीं। घायल वृद्ध दंपती घनश्याम केसरी(58) व उनकी पत्नी तिलोतमा(55) की हालत गंभीर बताई जाती है।
कैसे हुए एक्सीडेंट
दरअसल घनश्याम केसरी स्कूटर से पत्नी के साथ बाजार में खरीदारी करने निकले थे। अचाकन रथयात्रा मार्ग पर चक्कर आ गया। जिससे गाड़ी से दोनों गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। चिकित्सकों के मुताबिक अगर डीएम ने समय रहते भर्ती ने कराया होता तो जान भी जा सकती थी।
मैने सिर्फ ड्यूटी पूरी की, हर आदमी घायलों की करे मदद
डीएम योगेश्वर ने कहा कि मैने कोई नजीर पेश नहीं की, बल्कि घायल की मदद की। हर आदमी को घायल की मदद करनी चाहिए। कोई भी सड़क पर परेशान हाल में मिले तो उसे तत्काल अस्पताल में भर्ती कराकर मानव धर्म निभाएं। इसमें बहुत खुशी मिलती है।
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