आज के रावण का कौन करेगा संहार, हर दिन 59 लड़कियों की लुट रही इज्जत, 63 का अपहरण

Oct 11, 2016
आज के रावण का कौन करेगा संहार, हर दिन 59 लड़कियों की लुट रही इज्जत, 63 का अपहरण
हर रोज …59 लड़कियों के साथ दुष्कर्म।, 111 संग छेड़छाड़ और 63 का अपहरण। हर साल करीब एक लाख बच्चों का अपहरण हो जाना। जिसमें से लड़कों की तुलना में लड़कियों की संख्या डेढ़ गुनी। जी हां यह आंकड़े चीख-चीखकर कहते हैं कि देश में न महिलाएं सुरक्षित हैं न बच्चे। घऱ से लेकर बाहर। हर कदम उन्हें अजीब से भय के मंजर से गुजरना पड़ता है। यानी गली-गली रावण आज मौजूद हैं। खैर उस रावण ने तो सीता को छूने की कोशिश नहीं की थी मगर आज के बुराई के प्रतीक रावण हर मुमकिन अपराध में लिप्त हैं। चोरी-बेईमानी, हत्या, लूट हो या दुष्कर्म। विजयादशमी पर हर बार रावण के पुतले का दहन होता है, मगर गली-गली के ये रावण हमेशा अट्टहास करते देखे जाते हैं। सिस्टम भी कभी इन रावणों का बाल बांका नहीं कर पा रहा। जिससे समाज में इनके डर का कारोबार चल रहा।
दो साल तक रावण ने सीता को रखा था कैद में  
आश्विन महीने में नवरात्रि का समापन होने के दूसरे दिन दशम को विजयादशमी यानी विजयपर्व मनाया जाता है। इस त्योहार से वर्षाऋतु का समापन माना जाता है। कथा के मुताबिक इसी दिन भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का वध किया था। राम के लौटने पर अयोध्यावासियों ने खुशी में घी के दीये जलाए थे। तब से विजयादशमी पर्व मनाया जाने लगा। रावण सीता का हरण कर लंका ले गया था। अशोक वाटिका में कैद किया था तो हनुमान ने सीता के वहां होने का पता लगाया। बाद में  श्रीराम ने वानरों की सेना के साथ लंका पर चढ़ाई की और लंबी लड़ाई के बाद लंकापति रावण को मारने में सफल रहे। रावण ने दो साल तक सीता को अशोक वाटिका में बंधक की तरह रखा था।
बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है पर्व
 प्रभु श्रीराम द्वारा लंकापति रावण को मारे जान पर विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है। यह संदेश देता है कि हमें जीवन में कभी अहंकार नहीं करना चाहिए। क्योंकि बहुत बड़ा विद्वान होने के बाद भी रावण अहंकार से नहीं बच सका। पूरे राज्य के साथ परिवार तबाह कर बैठा। हमें प्रभु श्रीराम के मर्यादाओं का पालन करना चाहिए। तभी जीवन का कल्याण होगा।
विजयादशमी पर एक कविता के साथ बात खत्म
लाखों रावण गली गली हैं, इतने राम कहाँ से लाऊं?
चीर हरण जो रोक सकेगा वो घनश्याम कहाँ से लाऊँ?
बापू सा जो पूजा जाये प्यारा नाम कहाँ से लाऊँ
श्रद्धा से खुद शीश नवा दूँ अब वो धाम कहाँ से लाऊँ?
जो सच कहने से बन जाये ऐसा काम कहाँ से लाऊँ?
जीवन की कड़वाहट हर ले मीठा जाम कहाँ से लाऊँ?
दिल मेरा खुश होकर गाये ऐसी शाम कहाँ से लाऊँ?
मन में जो उजियारा कर दे वैसा दीप कहाँ से लाऊँ..
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