नोटबंदी से यूपी के किसानो पर आ गिरी है आफत, फ्री में बाट रहे आलू

Dec 21, 2016
नोटबंदी से यूपी के किसानो पर आ गिरी है आफत, फ्री में बाट रहे आलू

स्विस बैंक से कालाधन लाने के बजाय केंद्र सरकार देश से ही कालाधन खोजने के लिए 42 दिन पहले लाई गई नोटबंदी की योजना ने आमजनता खासकर गरीब मजदूर और किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है। कई फैक्ट्रियां बंद हो चुकी है। लोग शहरों से पलायन कर रहे है। वहीं गेहूं की फसल लेट होने के बाद अब आलू के किसान परेशान हैं। उत्तर प्रदेश के रहने वाले ज्वाला प्रसाद ने एक ऑफर निकल था जो पहले उन्होंने ऐसा कभी नहीं किया था। उन्होंने बताया कि वो मुफ्त में आलू बांट रहे हैं। ये ए-ग्रेड वाले बड़े आलू हैं, जिन्हें आमतौर पर 11 रुपये प्रति किलो के रेट पर बेचा जाता है। वह कहते हैं, अगर आप 5 दिन पहले आए होते तो फूलगोभी और बैंगन भी मुफ्त में मिलते। ऐसे ही अन्य किसानों के पास भी कोई विकल्प नहीं है। वे या तो अपनी फसल को कोल्ड स्टोरेज में छोड़ें या उनके पास इसे खेत में ही कुचल देने का विकल्प है।

8 नवंबर से सरकार ने 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोटों को बंद करने का ऐलान किया था, जिसके बाद से कैश की कमी हो गई है। इससे किसानों पर काफी मार पड़ी है। पहले तो उन्हें कैश की कमी के चलते रबी सीजन की फसल बोने में मुश्किल हुई अब उन्हें फसल बेचने में भी दिक्कत हो रही है। आलू की फसल किसानों ने सड़क किनारे सड़ने के लिए छोड़ दी है। किसानों को मंडियों में ग्राहक न मिलने के कारण स्थिति यह हो गई है कि कई जगहों पर कोल्ड स्टोरेज के बाहर बोरियों में आलू पड़ा हुआ है। अगर कुछ खरीददार हैं भी तो रेट्स इतने कम हैं कि किसानों के लिए ट्रांसपॉर्टेशन की लागत देकर आलू बेचना घाटे का सौदा साबित हो रहा है।

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