राज्यसभा में महिला सदस्यों की मांग- हिंसा बंद करो, दो 33 फीसद आरक्षण

Mar 08, 2016

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मंगलवार को राज्यसभा में सभी महिला सदस्यों ने संसद और विधानमंडलों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की एक स्वर में मांग की.

साथ ही समाज में पुरूषों से अपने घर में महिलाओं को सम्मान तथा उनका हक देने के लिए अपनी सोच तथा मानसिकता में बदलाव लाने की बात कही.

शून्यकाल के दौरान इन महिला सदस्यों ने यह भी कहा कि हर साल रस्मी तौर पर महिला दिवस मनाने की बजाय समाज में महिलाओं के खिलाफ हिंसा को समाप्त करने और उन्हें उचित सम्मान देने तथा उनका सशक्तिकरण करने की जरूरत है.

सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सभापति डॉ. हामिद अंसारी ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर अपना संदेश पढ़ा और इस बात पर गहरी चिन्ता व्यक्त की कि समाज में महिलाओं के खिलाफ हिंसा की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं और उन्हें पुरूषों के समान अधिकार तथा अवसर नहीं मिल रहे हैं. उन्होंने कहा कि देश के सतत विकास के लिए महिलाओं का सशक्तिकरण होना जरूरी है तथा लोगों की मानसिकता में भी बदलाव लाए जाने की आवश्यकता है.

इसके बाद अल्पसंख्यक मामलों की केन्द्रीय मंत्री डॉ. नज्मा हेपतुल्ला, कांग्रेस की अम्बिका सोनी, विप्लव ठाकुर, शैलेजा, रेणुका चौधरी, रजनी पाटिल तथा अन्नाद्रमुक की शशिकला पुष्पा ने एक स्वर में महिला आरक्षण विधेयक को लोकसभा में पारित कराने की मांग की. उपसभापति पी जे कुरियन ने भी कहा कि राज्यसभा ने महिला आरक्षण विधेयक पारित कर दिया है, अब लोकसभा को इसे पारित करना है. उन्होंने यह उम्मीद जतायी कि लोकसभा एक दिन इस विधेयक को पारित करेगी.

नज्मा हेपतुल्ला ने कहा कि केवल विधानमंडल तथा संसद में ही महिलाएं नहीं आएं, बल्कि समाज की सभी सामान्य महिलाएं भी आगे आएं. उन्होंने कहा कि आप अपने घर में अपनी पत्नी, बेटी और बहू को निर्णय लेने का अधिकार दें. उन्होंने कहा कि घर में ही नहीं बल्कि सदन में भी महिलाओं के साथ भेदभाव है लेकिन महिलाओं के खिलाफ हिंसा बढ़ रही है. इसलिए उनकी रक्षा जरूरी है.

उन्होंने कहा कि सदन में इस तरह का एक प्रस्ताव पारित होना चाहिए ताकि एक संदेश देश में जाए.

कांग्रेस की विप्लव ठाकुर ने कहा कि आठ मार्च केवल रस्म अदायगी का दिवस बनकर रह गया है, व्यावहारिक स्तर पर कुछ नहीं हो पाता. उन्होंने कहा कि महिलाएं अपने घर के सभी सदस्यों का ख्याल रखती हैं, लेकिन उनके स्वास्थ्य पर कोई ध्यान नहीं देता.

उन्होंने यूनीसेफ की रिपोर्ट के हवाले से कहा कि झारखंड, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और आंध्रप्रदेश में आज भी बाल विवाह काफी हो रहे है. उन्होंने उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले में 85 प्रतिशत बाल विवाह की घटनाओं का जिक्र किया जिनका कड़ा विरोध सपा के नरेश अग्रवाल ने किया. तब उपसभापति पी जे कुरियन ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सरकार को इस मामले में कार्रवाई करनी चाहिए.

कांग्रेस के रजनी पाटिल ने कहा कि अगर राजीव गांधी ने पंचायतों में महिलाओं के लिए आरक्षण नहीं लाया होता तो वह जिला पंचायत में चुनकर आगे बढ़ते हुए आज सांसद नहीं बनतीं.

अन्नाद्रमुक की शशिकला पुष्पा ने कहा कि समाज में महिलाओं के खिलाफ 9.2 प्रतिशत हिंसा बढ़ी है और अभी तक संसद में केवल 12 प्रतिशत महिलाओं का ही प्रतिनिधित्व है.

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