बकाया कर पहुंचा सात लाख करोड रुपये पर: नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक

Mar 11, 2016

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने कहा कि मार्च 2015 में बकाया कर बढ़कर सात लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया जबकि मार्च 2014 में यह 5.75 लाख करोड़ रुपये रहा था.

कैग ने शुक्रवार को संसद में पेश रिपोर्ट में कहा कि आयकर कानून में बकाया वूसली और रिकवरी के स्पष्ट प्रावधानों जैसे बकायेदारों की चल-अचल संपत्ति जब्त करने या बेचने के साथ ही रिसीवर नियुक्त करने की व्यवस्था के बावजूद बकाये कर में बढोतरी हो रही है. रिपोर्ट में कहा गया है कि बकाये कर में से 96 प्रतिशत की वर्ष 2014-15 में वसूली कठिन हो गयी.

कैग ने कहा कि मांग किये जाने के बावजूद वसूली नहीं होने की मुख्य वजह रिवकरी वाली संपत्तियों का अपर्याप्त होना या संपत्ति के बारे में जानकारी नहीं मिल पाना है. इसके साथ ही इस तरह के मामलों की संपत्ति को बेचने और बकाये की मांग करने का मामला कई एजेंसियों के पास होता है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि कॉपरेरेट और गैर कॉपरेरेट के स्वैच्छिक अनुपालन के तहत घोषणायें वर्ष 2013-14 में 84.6 प्रतिशत थी जो वर्ष 2014-15 में घटकर 83.2 प्रतिशत पर आ गयी.

कैग ने कहा कि वर्ष 2014-15 में प्रत्यक्ष कर इससे पिछले वित्त वर्ष की तुलना में नौ प्रतिशत बढ़कर 57196 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. इसके बावजूद सकल कर राजस्व संग्रह में प्रत्यक्ष कर की हिस्सेदारी वर्ष 2014-15 में घटकर 55.9 प्रतिशत पर आ गयी जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष में यह 56.1 प्रतिशत रही थी.

रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2010-11 से वर्ष 2014-15 के दौरान कॉपरेरेट कर और आयकर में क्रमश: 9.5 प्रतिशत और 16.7 प्रतिशत की वाषिर्क बढोतरी दर्ज की गयी है. कैग ने कहा कि केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने लंबे समय से लंबित और माफ करने की आवश्यकता वाले हाई वैल्यू मामलों की निगरानी के लिए कोई तां नहीं बनाया है.

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