दिल्ली सरकार को झटका, हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

Sep 09, 2016
दिल्ली सरकार को झटका, हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

नई दिल्ली। अधिकारों की जंग में दिल्ली सरकार को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिल पाई है। सुप्रीम कोर्ट ने उप-राज्यपाल को राष्ट्रीय राजधानी का प्रशासक करार देने संबंधी दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। साथ ही कोर्ट ने एलजी के उस निर्देश पर भी रोक लगाने से इनकार कर दिया जिसमें आप सरकार के पिछले फैसलों की जांच के लिए पैनल के गठन की बात कही गई है। गौरतलब है कि गुरुवार को हाईकोर्ट ने 21 संसदीय सचिवों की नियुक्ति रद्द कर दी थी।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली 7 याचिकाओं पर केन्द्र और उप राज्यपाल नजीब जंग को नोटिस जारी किया है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि दिल्ली केन्द्र शासित प्रदेश है। संविधान के अनुच्छेद 239 एए के तहत विशेष प्रावधान किया गया है। उप-राज्यपाल ही राष्ट्रीय राजधानी के प्रशासक हैं और सभी फैसलों में उनकी मंजूरी जरूरी है। हाईकोर्ट ने पिछले साल लिए गए उन तमाम फैसलों को अवैध करार दिया था जो उप राज्यपाल की राय के बिना लिए गए थे।
कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि उप राज्यपाल दिल्ली कैबिनेट की सलाह के मुताबिक काम करने के लिए बाध्य नहीं है। अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी की सरकार ने इस फैसले को सुुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। न्यायाधीश एके सीकरी और नयायाधीश एनवी रमन्ना की पीठ ने केन्द्र और उप राज्यपाल को केजरीवाल सरकार की ओर से दाखिल याचिकाओं पर 6 हफ्ते में जवाब देने को कहा है। साथ ही कोर्ट ने दिल्ली सरकार को रिजॉइंडर फाइल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। यह रिजॉइंडर केन्द्र और उप राज्यपाल के जवाब को लेकर दाखिल करना है। मामले पर अगली सुनवाई 15 नवंबर को होगी।
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