रक्षा क्षेत्र में नीति में ‘व्यापक’ बदलाव राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ‘बड़ा खतरा: कांग्रेस

Jun 21, 2016

सरकार ने जो एफडीआई सुधारों की घोषणा की है उसे आरएसएस से संबद्ध एक संगठन ने जनता के भरोसे के साथ ‘विश्वासघात’ करार दिया जबकि विपक्षी पार्टियों ने रक्षा क्षेत्र में नीति में ‘व्यापक’ बदलाव को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ‘बड़ा खतरा’ बताया.

कांग्रेस ने इस फैसले को वापस लेने की मांग की.
कांग्रेस ने यह भी कहा कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) सुधार ‘घबराहट में व्यक्त प्रतिक्रिया’ हैं. पार्टी प्रवक्ता जयराम रमेश ने कहा कि अगर रघुराम राजन ने आरबीआई गवर्नर पद के लिए अपने दूसरे कार्यकाल की मनाही नहीं की होती तो यह नहीं किया जाता. सरकार ने हालांकि कहा कि सुधार पहल का राजन के फैसले के साथ कोई लेना-देना नहीं है.
माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में एफडीआई ‘खतरनाक’ है. उन्होंने कहा कि बेहद कम देश हैं जिन्होंने इस संवेदनशील क्षेत्र में एफडीआई को मंजूरी दी है.
बड़े सुधार का विरोध करते हुए तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ के नाम पर मोदी सरकार ‘ब्रेकिंग इंडिया’ कर रही है.
आरएसएस से संबद्ध स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) ने कहा कि एफडीआई सुधारों का लक्ष्य नौकरियां पैदा करना नहीं है. उसने कहा, ‘‘इसका लक्ष्य भारतीय लोगों से रोजगार छीनना है. यह स्थानीय व्यापारियों को तबाह कर देगा.’’
एसजेएम के राष्ट्रीय सह-संयोजक अिनी महाजन ने कहा, ‘‘खुदरा, रक्षा और फार्मा जैसे क्षेत्रों को एफडीआई के लिए खोलना और मानदंडों में ढील देना देश की जनता के साथ विश्वासघात है. ऐसा करके सरकार ने देश के लिए और खासतौर पर स्थानीय व्यापारियों के लिए अच्छा नहीं किया है.’’
एक कठोर शब्दों वाले बयान में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति का मतलब है कि इसने नाटो-अमेरिकी रक्षा निर्माताओं के हाथ में बहुत कुछ डाल दिया है.
एंटनी ने कहा कि एफडीआई नीति में ‘व्यापक’ बदलाव ने राष्ट्रीय सुरक्षा और भारत की स्वतंत्र विदेश नीति के लिए बड़ा खतरा पेश किया है.
उन्होंने कहा, ‘‘स्वाभाविक तौर पर यह भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को भी प्रभावित करेगा. यह राष्ट्रीय सुरक्षा को भी खतरा पहुंचाएगा. इसके अलावा, इसका देश में स्वदेशी रक्षा शोध गतिविधियों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा.’’
उन्होंने कहा कि इस बात पर गौर करना ‘बेहद महत्वपूर्ण’ है कि ये सारे बदलाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अमेरिका यात्रा के तत्काल बाद किए गए हैं.
एंटनी ने कहा, ‘‘मैं इस कदम की पुरजोर निंदा करता हूं. यह देश और जनता के हितों के खिलाफ है. मैं मोदी सरकार से अनुरोध करता हूं कि वह राष्ट्रीय हित को प्रभावित करने वाले फैसलों को वापस ले.’’
वक्तव्य में तृणमूल कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता डेरेक ओ ब्रायन ने कहा, ‘‘तृणमूल ने लगातार इस नीति का विरोध किया है और हमारे चुनाव घोषणा पत्र और संसद समेत विभिन्न मंचों पर इसके लिए अपने कारणों को उजागर किया है.’’
वक्तव्य में कहा गया है, ‘‘इसका रोजगार, अर्थव्यवस्था और भारतीय बाजार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. ‘मेक इन इंडिया’ के नाम पर वे भारत को तोड़ रहे हैं.’’
येचुरी ने कहा कि मोदी सरकार विदेशी निवेशकों को भारत में लाभ कमाने का मौका दे रही है.
उन्होंने कहा, ‘‘देश को इससे फायदा नहीं होने जा रहा है. रक्षा क्षेत्र में एफडीआई खतरनाक है- बेहद चंद देश हैं जहां इस क्षेत्र में एफडीआई की अनुमति है. यह देश की सुरक्षा का मामला है. रक्षा क्षेत्र में सुरक्षा पहलुओं की वजह से एफडीआई नहीं दी जाती है.’’

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