दीन की आवाज़ मुल्कों की सरहदों को पार करके अफ्रीका के जंगलों में पहुंच गई

Aug 17, 2017
दीन की आवाज़ मुल्कों की सरहदों को पार करके अफ्रीका के जंगलों में पहुंच गई
मुफ़्ती उसामा इदरीस नदवी
हज़रत मौलाना कलीम सिद्दीक़ी साहब का नाम भारत में एक विशेष काम के लिये जाना जाता है और वो है दावत दीन,बिछड़े हुए लोगो को उनके मालिक से मिलवाना और सकून की तलाश में भटक रही इंसानियत को चश्मा ऐ नुबव्वत से सैराब कराना।
अभी दो तीन दिन पहले भारत से सात समन्दर पार दूर अफ्रीका के जँगल में आबाद एक राज्य से लोग आये जो सच्चाई की तलाश औ जुस्तुजू में,अपने आपको और अपने खानदान को जहन्नम की आग से बचाना चाहते थे।उन्हें हक़ की तलाश थी,वो पयाम ऐ इंसानियत की शमा के परवाने थे,उन्हें मालूम था कि भारत के गाँव फुलत में एक बुज़ुर्ग है,इंसानियत का हमदर्द औ गमख़्वार है जो सुबह औ शाम रात और दिन मानवता की सेवा में लगा हुआ है वह मानवता को नर्क से बचाकर सत्य मार्ग की और बुला रहा है।
उसके दिल में मानवता के लिये तड़प है,दर्द है,कुढ़न है,वो पूरी दुनिया को प्यार मुहब्बत शाँति अम्न औ सलामती का सन्देश देना चाहता है।
वह लोग आये फुलत में कई दिन रहे 14 अगस्त को मैं भी फुलत उनसे मुलाक़ात के लिये पहुँचा तो मुझे जानकर बड़ी ही हैरानी हुई कि ये कोई मामूली आदमी नही हैं बल्कि ये तो एक बड़े आदमी हैं जो अपने राज्य में मुख्यमंत्री जैसी हैसियत रखते हैं।मिला इंग्लिश में वार्तालाप हुई थोड़ी ही देर में मुझे महसूस हुआ कि वह यहां पर बहुत खुश हैं।
परिचय करा दूँ तो समझने में आसानी होगी
अफ़्रीक़ा विश्व के बड़े महादीपों में शुमार होता है इस महादीप के ईस्ट में दुनिया में जनसंख्या के ऐतबार से 71 वे नम्बर का देश ज़ाम्बिया है।
ज़ाम्बिया में दस छोटे बड़े राज्य हैे सबसे बड़ा राज्य नॉर्थन प्रोविन्स है जिसकी राजधानी कसामा है जिसमें 8 छोटे छोटे जनपद हैं जिसके मुख्यमंत्री को चीफ कहा जाता है।
इस राज्य के मुख्यमंत्री यानी राजा या चीफ मोज़ीस् हैं जो मेरे पैतृक गाँव फुलत में हज़रत मौलाना कलीम सिद्दीक़ी साहब से ईसाई धर्म त्याग कर इस्लाम धर्म क़ुबूल करने के लिये आये थे  चीफ के साथ ज़ाम्बिया से तीन अन्य लोग सिक्योरटी सलाहकार समिति में मौजूद थे तमाम लोगो ने हज़रत से इस्लाम धर्म क़ुबूल कर ईसाईयत से तौबा की।चीफ भारत में अपने एक हफ्ते के गैर सरकारी दौरे पर थे।
चीफ ने इस्लाम धर्म क़ुबूल कर फुलत में कई दिन गुज़ारे,इसके बाद जब वो फुलत से रवाना होने लगे तो उनके सम्मान में एक सभा का आयोजन मस्जिद में किया गया जिसमें चीफ ने कहा की मुझे इस्लाम क़ुबूल करके बड़ा ही दिली सुकून मिला है मैं चाहता हूँ कि हमारे बच्चे ज़ाम्बिया से फुलत मदरसे में पढ़ने के लिये आएँ और इस्लाम सीख़ कर जाएँ ताकि वो वहाँ पर तमाम लोगो को जहन्नम की आग से बचा सकें।
दोस्तों अल्लाह का शुक्र है कि हज़रत के द्वारा दावत दीन की आवाज़ मुल्कों की सरहदों को पार करके अफ्रीका के जंगलों में पहुंच गई है,जैसा कि नबी ऐ पाक का इरशाद है कि क़यामत से पहले हर कच्चे और पक्के घर में इस्लाम ज़रूर दाखिल होगा।पूरी इंसानियत हक़ की तलाश में है।
कुछ लोग हमारी जान के दुश्मन इस लिये बने हुए हैं क्योंकि हमने उन तक उनका हक़ नही पहुँचाया अगर हम सम्मान जनक जीवन जीना चाहते हैं तो हमें दावत दीन को अपना मिशन बना लेना चाहिये,फिर देखना तुम देहात से काम शुरू करो फैलते फैलते देशों की सरहदों को पार करके पूरी दुनिया में तुम्हें पहचान दिला देगा,दुनिया भी कामयाब होगी और आख़िरत में भी बहतरीन बदला मिलेगा।
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