दवे के निधन से मप्र में शोक की लहर, शुक्रवार को अंतिम संस्कार

May 19, 2017
दवे के निधन से मप्र में शोक की लहर, शुक्रवार को अंतिम संस्कार

मध्य प्रदेश से सांसद और केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री अनिल माधव दवे के निधन की गुरुवार की सुबह आई खबर से पूरे राज्य में शोक की लहर छा गई। राज्य सरकार ने दो दिन का राजकीय शोक घोषित किया है। दवे की इच्छा के अनुसार नर्मदा नदी के तट पर बांद्राभान में शुक्रवार सुबह उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। दवे को गुरुवार तड़के तबियत बिगड़ने पर दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ले जाया गया, जहां उनका निधन हो गया। दवे के पार्थिव शरीर को देर शाम वायुसेना के विमान से भोपाल लाया गया और आम लोगों के दर्शन के लिए भाजपा के प्रदेश कार्यालय में रखा गया है।

दवे के निधन की खबर सुनते ही उनके चाहने वाले उनके शिवाजी नगर स्थित ‘नदी के घर’ आवास पर जमा होने लगे। देर रात तक यहां बड़ी संख्या में लोग जमा रहे। दवे के प्रशंसक सिर्फ भाजपा ही नहीं, विरोधी दल कांग्रेस में भी हैं। उनकी योग्यता का सभी सम्मान करते थे।

दवे के निधन पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा, “हमने मां नर्मदा का सच्चा सपूत खो दिया है।” मुख्यमंत्री ने ट्विटर पर कहा, “भाई अनिल दवे आरएसएस और भाजपा के सच्चे कार्यकर्ता थे। उन्होंने आजीवन समर्पित भाव से सेवा की।”

एक अन्य ट्वीट में चौहान ने दवे के निधन को निजी क्षति करार देते हुए कहा, “अनिल दवे के रूप में देश ने एक सच्चा देश भक्त और मां नर्मदा का सपूत खो दिया है। इस क्षति की भरपाई कभी न हो सकेगी।”

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान ने दवे के निधन को बड़ी क्षति बताते हुए कहा, “हमने कुशल संगठनकर्ता, एक विचारक, चिंतक को खो दिया है।”

पार्टी के महामंत्री वी.डी. शर्मा ने दवे के निधन को व्यक्तिगत क्षति बताते हुए कहा है कि दवे उन नेताओं में से है जो कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन करते रहे हैं।

राज्य के राज्यपाल ओ. पी. कोहली ने शोक संदेश में कहा है कि दवे के निधन से देश और प्रदेश को अपूरणीय क्षति हुई है। उनके नर्मदा और पर्यावरण संरक्षण के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता।

मध्य प्रदेश के खनिज साधन मंत्री राजेंद्र शुक्ल, कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन, जनसंपर्क मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने दवे के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि दवे ने सार्वजनिक जीवन में सामाजिक सरोकारों से जुड़कर सक्रिय भूमिका निभाई। पर्यावरण के क्षेत्र में सैद्धांतिक और व्यावहारिक स्तर पर अध्ययन, अनुसंधान में रुचि रखते थे।

मध्य प्रदेश के गृह एवं परिवहन मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा कि दवे कुशल चिंतक, विचारक और पर्यावरणविद थे। पर्यावरण के हित के लिए उन्होंने मां नर्मदा की परिक्रमा की और समाज को जागृत किया।

राज्य की धर्मस्व एवं धार्मिक न्यास, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया, नगरीय विकास मंत्री माया सिंह, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव, उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया ने कहा कि एक सरल-सजग, धीर-गंभीर नेता हमने खोया है। उन्होंने पर्यावरण और नदी संरक्षण के क्षेत्र में जो काम किए हैं, वे आने वाली पीढ़ी के लिए सीख बनेंगे।

सामान्य प्रशासन राज्यमंत्री लाल सिंह आर्य, तकनीकी शिक्षा राज्यमंत्री दीपक जोशी, राजस्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता, महिला बाल विकास राज्यमंत्री ललिता यादव ने दवे के निधन को राज्य और देश के लिए बड़ी क्षति बताया है।

दवे के निधन पर राज्य के कांग्रेस नेताओं ने भी गहरा दुख व्यक्त किया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा कि उन्हें पर्यावरण और नदी संरक्षण से अत्यंत लगाव था।

पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दवे के निधन को बड़ी क्षति बताते हुए कहा, “मध्य प्रदेश ने श्रेष्ठ पर्यावरणविद और सुलझा हुआ राजनेता खो दिया है। ईश्वर उनके परिवार को इस दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करे, ऐसी कामना करता हूं।”

केंद्रीय वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अनिल माधव दवे की अंत्येष्टि 19 मई को वसीयत में जताई गई उनकी इच्छा के मुताबिक होशंगाबाद जिले के बांद्राभान में नर्मदा नदी के तट पर होगी। उनके द्वारा 23 जुलाई, 2012 को लिखी एक वसीयत सामने आई, जिसमें उन्होंने लिखा है, “संभव हो तो मेरा दाह संस्कार बांद्राभान में नदी महोत्सव वाले स्थान पर किया जाए।”

बांद्राभान वह स्थान है, जहां दवे हर दो साल बाद अंतर्राष्ट्रीय नदी महोत्सव का आयोजन करते रहे थे।

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