पढ़ाना नहीं चाहते थे पापा, दहेज के कारण शादी टूटी, अब मिली 40 लाख की स्कॉलरशिप

Aug 09, 2016
पटनाबिहार की शिल्पी गुप्ता को यूनिवर्सिटी ऑफ ग्रेनाडा ने यूरोपियन मास्टर्स डिग्री इन वुमन एंड जेंडर स्टडीज के लिए चयन किया है और अब उन्हें चालीस लाख रूपये की स्कॉलरशिप मिलेगी। शिल्पी एक ऐसी लड़की है, जिसकी अब तक की जिंदगी में काफी संघर्ष रहे। पिता 10वीं के आगे पढ़ाना नहीं चाहते थे। शादी तय हुई लेकिन दहेज के कारण टूट गई। पढ़ने के लिए दिल्ली गई तो घरवालों ने पैसे नहीं दिए। ट्यूशन करके पढ़ाई की और आज जो कुछ मिला उसे देखकर सरा गांव खुश है।
शिल्पी गुप्ता बिहार के नवादा जिले के खगड़िया की रहने वाली हैं। 2006 में शिल्पी ने फर्स्ट डिविजन से दसवीं की परीक्षा पास की थी। वह आगे पढ़ना चाहती थी लेकिन उनकेे पापा इसके लिए तैयार नहीं थे। पिता ने दसवीं से आगे की पढाई करने से रोक दिया था।
वे जल्द से जल्द उनकी शादी कर देना चाहते थे और उसकी शादी भी तय कर दी थी लेकिन दहेज की भरपाई नही कर पाए इसलिए शादी टूट गई। तब शिल्पी बमुश्किल 16 साल की थी। अपनी धुन की पक्की शिल्पी ने घर में विद्रोह कर इंटर की परीक्षा पास की और इसके बाद जब उन्होंने जेएनयू में एडमिशन के लिए इंट्रेंस एग्जाम दिया और वे सफल हुई।
शिल्पी ने जब घर में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की बात की तो सबने इसका जमकर विरोध किया। लेकिन सबके विरोध के बाद भी अपनी जिद से वह ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए दिल्ली पहुंच गई। यहां स्काॅलरशिप के चार हजार रुपए मिले। उनकी फैमिली को लगा कि जब पैसे खत्म हो जाएंगे तो वह वापस लौट आएगी लेकिन शिल्पी ने हिम्मत नहीं हारी।
दिल्ली में उन्होंने बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया, पैसे जोड़े और दिल्ली में ही जम गई। फिर शिल्पी ने स्पेनिश लैंग्वेज से पीजी तक पढ़ाई की। फिर एम फिल की। तभी यूनिवर्सिटी आॅफ ग्रेनाडा ने रिसर्च के लिए विश्व स्तर पर 100 लोगों को चुना। इनमें दस का आखिरी रूप से चयन हुआ, जिसमें शिल्पी भी है।
यूनिवर्सिटी ऑफ ग्रेनाडा ने यूरोपियन मास्टर्स डिग्री इन वुमन एंड जेंडर स्टडीज के लिए शिल्पी का चयन किया है। शिल्पी को दो साल में 49 हजार यूरो (करीब 40 लाख रुपए) की स्कॉलरशिप मिली है। पहले साल स्पेन में स्टडी करेगी। फिर रिसर्च के लिए शिल्पी कई यूरोपीय देश जाएगी। इसमें स्पेन, इटली, हंगरी, यूके, पोलैंड, नीदरलैंड और न्यूजर्सी यूनिवर्सिटी ऑफ ग्रेनाडा के पार्टनर है।
शिल्पी के परिवार में कोई पढ़ा-लिखा नहीं था। पिता संजय गुप्ता नाॅन मैट्रिक, मां अनुप्रिया देवी साक्षर, दादा साक्षर जबकि दादी निरक्षर थीं। शिल्पी के मुताबिक, बेटियों को इंगलिश स्कूल में भी नहीं भेजा जाता था। परिवार में मैट्रिक की पढ़ाई आखिरी थी।
शिल्पी ने बताया कि इसके लिए सिर्फ पापा जिम्मेदार नहीं थे। सामाजिक परिवेश ही ऐसा था। लेकिन दादा शिल्पी के पक्षधर थे। शिल्पी ने इस परंपरा को तोड़ा। वह खुद आगे बढ़ी। दो बहनों और एक भाई की भी मददगार बनी। दिल्ली में रहकर शिल्पी की बहन शिखा, बीएससी, जबकि शिवानी फ्रेंच से ग्रेजुएशन कर रही है। भाई आकाश बंगलुरू की निजी कंपनी में एकाउंटेंट है।
शिल्पी ने 2015 में अपनी पसंद से नवादा के सुशांत गौरव से बिना दहेज के परिवार की सहमति से शादी की।सुशांत स्पेनिश लैंग्वेज के प्रोफेसर हैं। शिल्पी के पिता संजय गुप्ता कहते हैं कि बेटी की सफलता पर उन्हें गर्व है। शिल्पी की सास प्रो. प्रमिला कुमारी भी खुश हैं। वे कहती हैं कि उनकी बहू ने उनके परिवार का मान बढ़ाया।
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