अदालत ने उमर खालिद की भूमिका में आगे जांच की जरूरत बताई

Mar 04, 2016

दिल्ली सरकार की मजिस्ट्रेट जांच में JNU छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार को क्लीन चिट मिल गई है। जांच रिपोर्ट के मुताबिक कन्हैया के खिलाफ देशविरोधी नारेबाजी का कोई सबूत नहीं पाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, सात में से तीन वीडियो के साथ छेड़छाड़ हुई है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सरकार की कानूनी टीम रिपोर्ट का अध्ययन करेगी उसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं उमर खालिद की भूमिका में आगे जांच की जरूरत बताई गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, कन्हैया वहां मध्यस्थता के लिए मौजूद था। कन्हैया को दिल्ली हाई कोर्ट ने छह महीने की अंतरिम जमानत दी थी। रिपोर्ट में उमर को संदिग्ध बताते हुए कहा गया है कि उमर खालिद कार्यक्रम का मुख्य आयोजक था, उसे कश्मीर के आत्मनिर्णय और अफजल गुरु को लेकर उसके रुख के लिए जाना जाता है। उसने पहले भी इस तरह के कई कार्यक्रमों का आयोजन किया था।

रिपोर्ट के अनुसार खालिद कई अन्य वीडियो में भी दिखाई दिया है और साक्ष्यों के आधार पर यह माना जा सकता है कि शुरू की नारेबाजी उसने की जिसके बाद स्थिति और बिगड़ी। रिपोर्ट में खालिद की भूमिका की जांच की अनुसंशा की गई है। अनिर्बान और आशुतोष के बारे में रिपोर्ट में कहा गया है कि इन्होंने संभवत: दूसरा और तीसरा नारा लगाया जो कि अफजल को लेकर था, हालांकि यह वीडियो या गवाहों से स्पष्ट नहीं है।

मालूम हो कि इस मामले की जांच के लिए कार्यक्रम के कुल सात वीडियो हैदराबाद के फोरेंसिक लैब में भेजे गए थे जिनमें से तीन वीडियो में छेड़छाड़ पाई गई जिनमें से एक समाचार चैनल की क्लिपिंग है। रिपोर्ट में वहां तैनात निजी सुरक्षा सेवा के 2 कर्मियों और अन्य साक्ष्यों के बयानों पर भी सवाल उठाए गए हैं। दिल्ली सरकार ने कन्हैया की गिरफ्तारी को लेकर व्यापक आक्रोश पैदा होने के बाद पिछली 13 फरवरी को जांच का आदेश दिया था।

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