पढ़ाई खर्चा और परिवार की आर्थिक मदद के लिए, ई-रिक्‍शा ड्राइवर बनीं सुप्रिया

Sep 12, 2016
पढ़ाई खर्चा और परिवार की आर्थिक मदद के लिए, ई-रिक्‍शा ड्राइवर बनीं सुप्रिया
पश्‍िचम बंगाल के कटवा में कॉलेज में पढ़ने वाली एक लड़की अपनी पढ़ाई का खर्चा उठाने और परिवार को आर्थिक मदद देने के लिए ई-रिक्‍शा चला रही है। बीए के तीसरे साल में पढ़ रही सुप्रिया रॉय अपने परिवार में एकमात्र कमाने वाली है।
ई-रिक्‍शा चलाने का यह कदम उसके लिए इतना आसान नहीं था। सुप्रिया के पिता दैनिक मजदूर थे जो कि बीमारी के कारण कुछ महीने पहले अपाहिज हो गए थे। सुप्रिया ने अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए ई-रिक्‍शा चलाने का जिम्‍मा लिया। लेकिन गलियों में अधिकांश लोगों ने इस नौकरी के लिए उसे हतोत्‍साहित किया।

उसकी मां ममता रॉय भी बेकार टिप्‍पणियों पर ध्‍यान नहीं देती। वह कहती है ‘बेटी अकेले इस परिवार को चला रही है। यह आसान काम नहीं है। लोग क्‍या कहते हैं इस बारे में हम कुछ नहीं कहना चाहते हैं।

जब उसके पिता ने बिस्‍तर पकड़ा तब सुप्रिया परिवार के सपोर्ट के लिए ट्यूशन लेती थी लेकिन वह पैसा काफी नहीं था। उसके बाद उसने अपने एक रिश्‍तेदार से संपर्क किया ताकि वह उसे ई-रिक्‍शा चलाना सीखा सके। तब उसने गाड़ी उधार ली। तब से पहल कटवा के काशीगंज में एक कमरे के घर के सभी बिल भर रही है और खुद व अपनी सबसे छोटी बहन की पढ़ाई का खर्चा उठा रही है। अब पूरा समुदाय ही नहीं बल्‍कि सुप्रिया के पुरुष ई-रिक्‍शा साथी भी उसके समर्थन में आगे आए हैं।
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