सरकार के लिए संविधान ‘वास्तविक पवित्र ग्रंथ’ है: मोदी

Jun 09, 2016

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के मानवाधिकार रिकॉर्ड का यह कहते हुए बचाव किया कि उनकी सरकार के लिए संविधान ‘वास्तविक पवित्र ग्रंथ’ है.

उन्होंने कहा संविधान सभी नागरिकों को आस्था और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है, भले ही उनकी कोई भी पृष्ठभूमि हो.

मोदी ने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के स्पीकर पॉल र्यान के आमंत्रण पर अमेरिकी कांग्रेस की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए कहा, ”भारत एकजुट होकर रहता है, भारत एकजुट होकर आगे बढ़ता है और भारत एक होकर जश्न मनाता है.”

मोदी ने अपने 45 मिनट के भाषण में कहा, ”मेरी सरकार के लिए संविधान ही वास्तविक पवित्र ग्रंथ है. और इस पवित्र ग्रंथ में आस्था की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति और मताधिकार और सभी नागरिकों के लिए समानता का अधिकार मौलिक अधिकार के रूप में शामिल किया गया है, भले ही उनकी कोई भी पृष्ठभूमि हो.” इस अमेरिकी कांग्रेस की संयुक्त बैठक में उपराष्ट्रपति जो बाइडेन ने भी हिस्सा लिया.

उनका बयान यूएस कमीशन फॉर इंटरनेशनल रिलिजियस फ्रीडम के वाषिर्क रिपोर्ट की पृष्ठभूमि में आया है जिसमें दावा किया गया था कि भारत में धार्मिक स्वतंत्रता का 2015 में नकारात्मक रिकार्ड रहा क्योंकि धार्मिक सहिष्णुता में गिरावट आई है और धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन में वृद्धि हुई है.

मोदी ने कहा, ”मेरे देश के 80 करोड़ लोग हर पांच साल पर मताधिकार की स्वतंत्रता का इस्तेमाल कर सकते हैं. लेकिन हमारे सभी 1.25 अरब नागरिक भय से मुक्त हैं, जिसका वो अपने जीवन के हर क्षण में इस्तेमाल करते हैं.”

अंग्रेजी में अपना भाषण देते हुए मोदी ने कहा कि भारत और अमेरिका ने अलग इतिहास, संस्कृतियों और आस्था से शक्ल लिया हो. उन्होंने कहा, ”उसके बावजूद हमारे देशों की लोकतंत्र में आस्था और हमारे देशवासियों के लिए स्वतंत्रता साझा है. सभी नागरिक समान हैं यह विचार अमेरिकी संविधान का मुख्य स्तंभ हो सकता है.”

मोदी ने कहा, ”लेकिन हमारे संस्थापकों ने भी समान मत साझा किया और भारत के प्रत्येक नागरिक के लिए व्यक्तिगत स्वतंत्रता मांगी. अनेक लोग थे जिन्होंने भारत ने जब नए राष्ट्र के तौर पर जन्म लिया तब भारत पर संदेह किया. हमने लोकतंत्र में अपनी आस्था जताई. इसके बावजूद, हमारी विफलता पर शर्त लगाई गई. लेकिन, भारत के लोग नहीं लड़खड़ाए.”

उन्होंने कहा, ”हमारे संस्थापकों ने एक आधुनिक राष्ट्र का निर्माण किया जिसमें स्वतंत्रता, लोकतंत्र और समानता इसकी आत्मा का सार है. ऐसा करते हुए उन्होंने सुनिश्चित किया कि हम अपनी वर्षों पुरानी विविधता की सराहना भी जारी रखें.”

मोदी ने कहा, ”आज भारत की सभी सड़कों और संस्थानों में, उसके गांवों और शहरों में सभी आस्थाओं के लिए समान सम्मान है और उसकी सैकड़ों भाषाओं और बोलियों में मधुरता है. भारत एक होकर रहता है, भारत एक होकर आगे बढ़ता है और भारत एक होकर जश्न मनाता है.”

मोदी ने कहा कि भारत मानवता की सेवा में ”स्वतंत्र लोगों की धरती और बहादुर लोगों के गृह” से पुरुषों और महिलाओं के महान बलिदान की सराहना करता है.

उन्होंने कहा, ”भारत जानता है कि इसका क्या मतलब है क्योंकि हमारे सैनिकों ने भी इन्हीं आदर्शों के लिए सुदूर युद्धक्षेत्रों में प्राणों की आहूति दी है. इसलिए स्वतंत्रता का धागा हमारे दो लोकतंत्रों के बीच एक मजबूत बंधन बनाता है.”

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