कांग्रेस के लिए महंगा साबित होगा भारत अधिकृत कश्मीर बयान?

Aug 19, 2016

लखनऊ। सूबे की सियासत हो या फिर देश की, दोनों में बयानों का बड़ा मोल है। सवाल अब से है, जिसकी वजह है कांग्रेसी नेता का भारत अधिकृत बयान। दरअसल सूबे के साथ ही देश के लोग यह जानना चाहते हैं कि क्या वाकई कश्मीर पर भारत का दखल गलत है। और पाक अधिकृत कश्मीर में क्या पाक का दखल वास्तव में सही है।

वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए कांग्रेस के रणनीतिकार पीके जहां कोई कमी नहीं छोड़ना चाहते जबकि इस तरह के बयान कांग्रेस का बड़ा नुकसान कर रहे हैं। पेश है ये रिपोर्ट-

दिग्विजय सिंह के बयान से टकराव

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल पहुंचे दिग्विजय सिंह ने गुरुवार को संवाददाताओं को बताया, “प्रधानमंत्री मोदी को पाक अधिकृत कश्मीर की ज्यादा चिंता है, इसके लिए वे बधाई के पात्र है लेकिन वे हिंदुस्तान के कश्मीरियों से बात करने को तैयार नहीं है। अगर हमें कश्मीर के लोगों के मन में विश्वास पैदा करना है फिर चाहे वह पाक अधिकृत कश्मीर हो या भारत अधिकृत कश्मीर तो यह वहां के लोगों से बातचीत के जरिए ही संभव है।” दिग्विजय सिंह के इस बयान के बाद राजनीति समेत वामपंथी और दक्षिणपंथी विचारधाराओं के लोगों के बीच टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई।

कांग्रेस का नुकसान

अब यदि उत्तर प्रदेश के लिहाज से बात की जाए तो दिल्ली की पूर्व सीएम और उत्तर प्रदेश में कांग्रेस द्वारा घोषित सीएम कैंडिडेट शीला दीक्षित को लाने का मकसद यही था कि ब्राह्मण वोटों में सेंधमारी करके कांग्रेस उसे अपने पक्ष में जुटा सके। हालांकि हिंदुत्व पर आगे बढ़ने वाला समुदाय भारत के कश्मीर पर ”दखल” जैसी बात को कतई बर्दाश्त नहीं करता। जिसके तमाम सबूत मिलते रहे हैं। ऐसे में पीके के द्वारा ब्राह्मण वोटों को जुटाने की गुपचुप तरीके से जुगत भी नाकामयाब हो सकती है।

विश्लेषकों की राय

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो प्रदेश में 18 प्रतिशत मतदाता सवर्ण वर्ग के अंतर्गत आता है। ये मतदाता जिस पार्टी की ओर भी रूझान दर्शाने लगे उस पार्टी के पक्ष में माहौल बनने लगता है। ऐसे में सवर्णों को नाराज करना कांग्रेस के लिए घाटे का सौदा है। और वो भी तब जबकि कांग्रेस 18 प्रतिशत में से 12 प्रतिशत ब्राह्मण वोटबैंक पर फोकस कर रही हो।

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