कश्मीर पर मोदी के दृष्टिकोण की कांग्रेस ने की आलोचना

Apr 04, 2017
कश्मीर पर मोदी के दृष्टिकोण की कांग्रेस ने की आलोचना

कश्मीर के युवाओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए संदेश पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कांग्रेस ने सोमवार को कहा कि उन्हें आत्ममंथन करने की जरूरत है कि क्या कश्मीर को अलग-थलग रखने की जरूरत है या जोड़ने की। मोदी ने रविवार को कश्मीरी युवाओं से पर्यटन या आतंकवाद में किसी एक को चुनने के लिए कहा था।

कांग्रेस ने सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि उसने पिछले एक साल में कश्मीर के लोगों में अलगाव की भावना पैदा की है।

कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने यहां मीडिया कर्मियों को संबोधित करते हुए कहा, “प्रधानमंत्री राज्य के लोगों से कह रहे हैं कि उन्हें आतंकवाद और पर्यटन में एक को चुनना चाहिए, वहीं उन्हें भी यह आत्ममंथन करने की जरूरत है कि क्या कश्मीर को अलग-थलग करने की जरूरत है या जोड़ने की।”

उन्होंने कहा, “वास्तव में राज्य की भाजपा-पीडीपी सरकार ने और केंद्र की राजग सरकार ने पिछले एक साल में लोगों में अलगाव की भावना बढ़ाई है।”

प्रधानमंत्री के ‘टूरिज्म या टेररिज्म’ (पर्यटन या आतंकवाद) वाली टिप्पणी के बारे में पूछने पर तिवारी ने कहा, “यह एक बयानबाजी है। यह कोई पेशकश भी नहीं है।”

उन्होंने कहा, “यह सुनिश्चित करना केंद्र और राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि अलगाव की भावना समाप्त हो। पिछले वर्ष जब हिंसा चरम पर थी तो एक बहुदलीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल घाटी के दौरे पर गया था। केंद्र ने उस पहल के बाद कुछ नहीं किया।”

उन्होंने कहा, “उन परिस्थितियों में इस तरह की बयानबाजी (आतंकवाद और पर्यटन के बीच चयन और यह कि सुरंग पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर के लिए विकास का एक आईना है) आपको कहीं नहीं छोड़ती।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा था कि घाटी के युवाओं को अपना भविष्य संवारने के लिए आतंकवाद और पर्यटन के बीच चुनाव करना है।

मोदी ने कहा था, “मैं घाटी के युवाओं से कहना चाहता हूं कि आपके पास दो रास्ते हैं, जो आपके भविष्य को तय करेंगे -आपके पास एक रास्ता पर्यटन का है और दूसरा रास्ता आतंकवाद का।”

तिवारी ने यह भी कहा कि भाजपा सांप्रदायिकता की भाषा बोलकर विकास के मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने कहा, “भाजपा 2014 में विकास (सबका साथ सबका विकास) का वादा कर सत्ता में आई थी, न कि सांप्रदायिकता के बैनर के जरिए। लेकिन पिछले कुछ महीनों में हमने सांप्रदायिकता को जिस तरह सिर उठाते हुए देखा है, उसका प्राथमिक कारण यह है कि सरकार विकास के एजेंडे को पूरा करने में पूरी तरह विफल साबित हुई है।”

तिवारी ने आगे कहा, “प्रधानमंत्री ने युवाओं से वादा किया था कि वे हर महीने 10 लाख नौकरियां तैयार करेंगे। वे ऐसा नहीं कर पाए। इसलिए विकास के मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए वे सांप्रदायिकता की भाषा बोल रहे हैं।”

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