नौमहला मस्जिद जहां होती थी, ब्रितानिया हुकुमत के खिलाफ गोपनीय बैठक

Aug 16, 2017
नौमहला मस्जिद जहां होती थी, ब्रितानिया हुकुमत के खिलाफ गोपनीय बैठक

आज हम आपको भारत में मौजूद नौमहला मस्जिद के बारे में बताएंगे। यह मस्जिद देशभक्ति की पत्थरों से बनी है। इसकी जमीन में दफर होकर भी जिंदा है अमर क्रांतिकारी। यहां अल्लाह की इबादत भी की जाती थी और वतन पर मरने-मिटने को बेताब वीर सपूतों के जज्बात भी बयां होते थे। नौमहला वो मस्जिद है जहां ब्रितानिया हुकुमत के खिलाफ क्रांतिकारियों की गोपनीय बैठक हुआ करती थी।

1749 में नौमहला मस्जिद वजूद में आई थी। यहां के मौलवी शाने अली ‘कमाल साबरी’ कहते हैं कि, सैयद शाजी बाबा ने इस मस्जिद की नींव रखी थी। यहां नमाज अदा की जाती थी। तब यह मस्जिद कच्ची बनी थी। 1906 में यहां पक्का निर्माण हुआ और तब यहां नौ महले बने थे। तभी से इसका नाम नौमहला मस्जिद पड़ा था। खान बहादुर खान के साथ दीवान पं. शोभाराम ओझा, तेगबहादुर, बरेली कालेज के शिक्षक मौलवी महमूद अहसन, शिक्षक कुतुबशाह, प्रो. मुबारक समेत कई क्रांतिकारियों ने कई बार यहां शरण ली थी। अंग्रेजों से छिपकर यहां मीटिंग होती थी।

ये भी पढ़ें :-  क्या बुलेट ट्रेन के कर्ज का ब्याज चुकाने के लिए बढ़ी है पेट्रोल-डीजल की कीमत?: शिवसेना

बताया जाता है कि यहां से इमाम महमूद हसन ने 22 मई 1857 को आजादी की खातिर अजान दी थी। जिसके बाद पूरा रुहेलखंड धधक उठा था। और फिर धर्म-मजहब की आग बुझाकर, हिंदू मुस्लिम एक हो गए थे और ब्रितानिया हुकुमत के खिलाफ क्रांति का बिगुल फूंका था।

अंग्रेजी हुकुमत के खिलाफ हुए पहले विद्रोह को दबाने के लिए अंग्रेजों ने पूरी ताकत लगा दी थी। फिर बाद में उन्हें पता चल गया कि नौमहला मस्जिद में क्रांतिकारियों को पनाह मिलती है। फिर उन्होंने मस्जिद पर हमला बोल दिया। यहां के इमाम सैयद इस्माइल शाह अजान देते हुए शहीद हुए थे। उस वक्त यहां सैयदों के परिवार रहा करते थे। गोरों से अपनी अस्मत बचाने के लिए सैयदों के परिवार की महिलाओं, लड़कियों ने उसी कुएं में कूदकर खुदखुशी की थी। बताया जाता है कि, उस कुएं का पानी ही लाल हो गया था। अब यह कुआं पाट दिया गया है।

ये भी पढ़ें :-  'बेटी बचाओ' का नारा 'बेटी पिटवाओ' में बदल गया: राज बब्बर
लाइक करें:-
 

संबंधित ख़बरें

वायरल वीडियो

और पढ़ें >>

मनोरंजन

और पढ़ें >>
और पढ़ें >>