सरकारी विशेषज्ञों की कमेटी ने माना-सरस्वती नदी के बहने की बात मिथक नहीं सच्चाई

Oct 17, 2016
सरकारी विशेषज्ञों की कमेटी ने माना-सरस्वती नदी के बहने की बात मिथक नहीं सच्चाई
आखिरकार भूवैज्ञाानिकों ने  अदृश्य सरस्वती नदी खोज निकाली। मोदी सरकार ने इसके लिए विशेषज्ञ वैज्ञानिकों की कमेटी गठित की थी। कमेटी ने रिसर्च के बाद अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। रिपोर्ट में नदी के बहाव क्षेत्र का उल्लेख किया गया है। कमेटी मुखिया वल्दिया ने बताया कि शोध के बाद पता चला कि हिमालय से निकलकर सरस्वती नदी पश्चमी सागर की खाड़ी में मिलती थी। इसका मतलब प्राचीन समय में इस नदी का अस्तित्व था।
समिति ने कहा-राजस्थान में बहती थी नदी
विशेषज्ञ समिति ने रिपोर्ट में स्वीकार किया है कि यह नदी  हरियाणा, राजस्थान और उत्तरी गुजरात से होकर बहती थी। इसके लिए समिति ने भूमि की बनावट का अध्ययन किया। अपनी रिपोर्ट में सात सदस्यीय समिति ने कहा कि नदी की दो शाखाएं थी- पश्चिमी और पूर्वी. अतीत में हिमालय से निकलने वाली सतलुज नदी प्राचीन सरस्वती नदी की पश्चिमी शाखा को दर्शाती है. वहीं मरकंडा और सरसुती इसके पूर्वी शाखा को दिखलाती हैंवहीं केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार कच्छ के रण के रास्ते पश्चिमी सागर में मिलने से पहले वह पाकिस्तान से होकर गुजरती थी और नदी की लंबाई करीब 4,000 किलोमीटर थी.
अधिकारी ने दावा किया कि नदी का एक तिहाई हिस्सा अभी पाकिस्तान में है. इसका दो-तिहाई हिस्सा अर्थात करीब 3000 किलोमीटर भारत में है.
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