जावेद साहब आइए बहस करते है कि दोस्त कौन है और दुशमन किसे कहते है

Sep 01, 2016
जावेद साहब आइए बहस करते है कि दोस्त कौन है और दुशमन किसे कहते है

आपने जुबान फिसलना तो बहूत सुना है पर कभी ये नहीं सुना है कि जुबान को हैजा हो गया है. जी हां आज जावेद अख्तर की जुबान को हैजा ही हो गया है, जब जावेद अख्तर ने

राज्यसभा में खड़े हो कर असद्दुदीन ओवैसी को गली का लीडर कहा था तब हमने सोचा था कि शायद जावेद साहब को ओवैसी साहब से चिढ़ है, पर जब उन्होंने मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड को मुसलमानों का दुशमन कहा तो मजबूर होकर पत्रकारिता के उसूलों के खिलाफ़ ये कहना पड़ा. जावेद अख्तर जो खुद एक गवैय्या हैं, जिनकी पत्नी शबाना अख्तर एक नाचने गाने वाली अदाकारा हैं, उनके ससुर कैफी आज़मी एक नास्तिक टाइप के मुसलमान थे, अब आप खुद ही फैसला कर सकते हैं कि जावेद अख्तर को इसलाम, या मुसलमानों के किसी भी मुआमले में जुबान चलाने,और फैसला करने का हक़ है या नहीं? तीन तलाक़,और मुस्लिम पर्सनल ला पर लिखुंगा, पर जावेद साहब से कहना चाहता हूँ, जनाब आप गाने लिखिये,राजनीति करिये,पर्दे पर आइये,इंटरव्यू दीजिये, पर इस्लाम को समझे बगैर, मुसलमानों के मुआमलात पर बोलने से पहले अच्छी तरह से सोच लिया करिए, जिस बोर्ड को आप मुसलमानों का दुशमन बता रहे हैं, आज उसी की वजह से मुस्लिम बच्चे स्कूलों में गीता, और वंदेमातरम से महफूज़ हैं, उसी बोर्ड की रणनीति,और कोशिशों की वजह से सिविल कोड आज तक लागू नहीं हो सका,

जिस की वजह से भीरतीय मुसलमान आजादी के इस देश की सेवा भी कर रहा है और अपने, धर्म का पालन भी कर रहा है, हाँ आप को बता दूं उसी बोर्ड की वजह से, इन मोलवियों की वजह से,उस जैसी तंजीमों की वजह से आज हिंदुस्तान में इसलाम जिंदा है, मुसलमान किसी से डरे बगैर,किसी के सामने झुके बगैर,एक अल्लाह,एक नबी,एक कुरान और एक शरीयत को मान रहा है,उसके विचारों पर अमल कर रहा है, पर आप को क्या?आप पर तो लिबरलिज़्म का भूत सवार है,आप ने तो आस्तीन में रह कर डसने को अपना कर्म समझ लिया है, तो सुनिये,मैँ आपको दावत देता हूँ,आइए बैठ कर उन तमाम मुद्दों पर बहस कर लेते हैं, जिन पर आप को आपत्ति है, फिर फैसला कर लेंगें,कौन मुसलमानों का दुशमन है? और कौन दोस्त?? पर सुनिये आइंदा से इस तरह के ओपेनियन हरगिज़ ना दीजिएगा जिस से देश भर के मुसलमान,और सारी दुनिया के इस्लाम पसंदों को तकलीफ़ हो, और उनका सिर शर्म से झुक जाये, वरना आज लिख कर चेलैंज कर रहा हूं,अगली बार स्टेज सजा कर चैलेंज करुंगा और आप को बहस के लिए आना पड़ेगा,फिर देश की जनता खुद फैसला कर लेगी कि किसे क्या करना चाहिए

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