चीन को अमेरिका-भारत के रक्षा सौदे से डरने की ज़रुरत नहीं: अमेरिका

Aug 31, 2016
चीन को अमेरिका-भारत के रक्षा सौदे से डरने की ज़रुरत नहीं: अमेरिका

भारत और अमेरिका के बीच हुए रक्षा समझौते पर ओबामा प्रशासन ने साफ़ कर दिया है कि उसे इस समझौते से घबराने की ज़रुरत नहीं है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कहा कि चीन को अमेरिका-भारत के इस रक्षा सौदे से डरने की ज़रुरत नहीं है, ये दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के लिए है न कि किसी को डराने के लिए। किर्बी ने कहा, भारत के साथ एक गहरे, मजबूत, ज्यादा सहयोगी द्विपक्षीय संबंध से किसी अन्य को डरने या इस बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं है। किर्बी दरअसल भारत और अमेरिका के बीच हुए रक्षा समक्षौते पर चीन की प्रतिक्रिया से जुड़े सवाल का जवाब दे रहे थे। यह समझौता इन दोनों देशों की सेनाओं को मरम्मत एवं आपूर्ति के लिए एक दूसरे की संपत्ति एवं अड्डे इस्तेमाल करने की इजाजत देता है।

किर्बी ने कहा, हम दोनों ही लोकतात्रिक देश हैं। वैश्विक मंच पर हम दोनों के ही पास अदभुत अवसर हैं और हमारा अदभुत प्रभाव है। अमेरिका और भारत के बीच बेहतर संबंध होना न सिर्फ दोनों देशों के लिए, न सिर्फ क्षेत्र के लिए बल्कि पूरे विश्व के लिए अच्छा है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, अमेरिका और भारत के बीच पहले से ही कई क्षेत्रों में शानदार साझेदारी है। यह सिर्फ रक्षा या सुरक्षा से जुड़ा नहीं है। यह आर्थिक, व्यापार एवं सूचना और प्रौद्योगिकी साक्षा करने के बारे में भी है।

अमेरिका ने कहा है कि वह इलाके में सक्रिय हक्कानी नेटवर्क जैसे आतंकवादी संगठनों की ओर से उत्पन्न खतरे को लेकर पाकिस्तान के साथ लगातार बातचीत कर रहा है। जान किर्बी ने बताया कि क्षेत्र में सक्रिय हक्कानी समूह और ऐसे ही अन्य संगठनों की ओर से पेश खतरे को लेकर हम हमारे पाकिस्तानी सहयोगियों के साथ लगातार बातचीत कर रहे हैं। किर्बी के मुताबिक इस मामले को लेकर पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय और पेंटागन के बीच किसी प्रकार के मतभेद नहीं है। हम नियमित रूप से इस प्रकार के फैसले करते हैं और वे फैसले पाकिस्तानी नेताओं के साथ हमारी सक्रिय बातचीत के आधार पर होते हैं। मुझे किसी मतभेद की जानकारी नहीं है। मैं समक्षता हूं कि अमेरिकी सरकार इस मामले को समान रूप से देख रही है। इससे पूर्व अमेरिकी रक्षा मंत्री एश्टन कार्टर ने पाकिस्तान को जरूरी कांग्रेसी अनुमोदन देने से इंकार कर दिया था और हक्कानी समूह के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं करने को लेकर पाकिस्तान को दी जाने वाली 30 करोड़ डालर की सैन्य सहायता को भी रोक दिया था।

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