मुख्यमंत्री जयललिता ने की PM मोदी से मुलाकात

Jun 15, 2016

तमिलनाडु के विधानसभा चुनावों में जीत के बाद अपनी पहली दिल्ली यात्रा पर आईं राज्य की मुख्यमंत्री जे जयललिता ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की.

उन्होंने कावेरी प्रबंधन बोर्ड तथा एक जल नियमन समिति के गठन समेत अन्य चीजों की मांगों वाला एक ज्ञापन प्रधानमंत्री को सौंपा.

प्रधानमंत्री के रेसकोर्स रोड स्थित आवास पर हुई मुलाकात के दौरान जयललिता ने उन्हें 29 पन्नों का ज्ञापन सौंपा जिसमें मुल्लापेरियार बांध का जल स्तर फिर से 152 फुट करने की मांग की गयी है. ज्ञापन में नदियों को जोड़ने, कच्चातिवू द्वीप को पुन: प्राप्त करने और मछुआरों को अनुसूचित जनजातियों की सूची में शामिल करने की मांगें भी सूचीबद्ध थीं.

जयललिता ने इस बात पर जोर दिया कि केंद्र सरकार जीएसटी के क्रियान्वयन से संबंधित मुद्दों पर राज्य की शिकायतों पर ध्यान दे. ज्ञापन में राज्य सरकार ने कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र की इकाई 2 में जल्द काम शुरू कराने का भी अनुरोध किया.

आज दोपहर में राजधानी पहुंची जयललिता ने अपनी पार्टी के 50 सांसदों से मुलाकात की और उसके बाद मोदी के आवास की ओर रवाना हो गयीं. उनके साथ लोकसभा उपाध्यक्ष एम थांबिदुरई, विशेष सलाहकार शीला बालाकृष्णन और मुख्य सचिव राम मोहन राव भी थे.

जयललिता ने केंद्र से अपने राज्य में एक एम्स स्थापित करने और एनईईटी से संबंधित मुद्दों का समाधान करने का भी आग्रह किया.

मुख्यमंत्री ने जो मांगें प्रधानमंत्री से की हैं, उनमें श्रीलंकाई तमिलों का मुद्दा, जल्लीकट्टू के आयोजन पर लगी पाबंदी को उठाने और तमिल को एक आधिकारिक भाषा घोषित करने की मांगें शामिल हैं. वह तमिल को मद्रास उच्च न्यायालय की भाषा के तौर पर उपयोग में लाने की अनुमति दिये जाने का फैसला भी चाहती हैं.

शाम को केंद्रीय मंत्रियों निर्मला सीतारमण और पी राधाकृष्णन ने उनसे तमिलनाडु भवन में मुलाकात की. नीति आयोग द्वारा मंजूर की जाने वाली योजनाओं के लिए बजट में से किये गये विशेष आवंटन से तमिलनाडु को केंद्र द्वारा जारी 552 करोड़ रुपये को ‘अल्प मुआवजा’ कहा गया है.

मुख्यमंत्री ने ज्ञापन में लिखा, ”मैं आपसे अनुरोध करती हूं कि 2019-20 तक 14वें वित्त आयोग के बाकी चार सालों में तमिलनाडु को विशेष वार्षिक अनुदान बढ़ाकर प्रति वर्ष दो-दो हजार करोड़ रुपये कर दिया जाए.”  उन्होंने कहा, ”हमारे पास बड़ी परियोजनाएं हैं जिनमें इस विशेष आवंटन में से धन लगाया जा सकता है.”

पिछले साल आई बाढ़ के मद्देनजर पुनर्निर्माण और बहाली के कार्यों के लिए और अधिक सहायता जारी किये जाने का जिक्र  करते हुए ज्ञापन में कहा गया है कि भारत सरकार ने अब तक राष्ट्रीय आपदा कोष से 1737 करोड़ रुपये जारी किये हैं, जबकि अस्थाई और स्थाई बहाली के लिए 25,912 करोड़ रुपये की मांग थी.

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