अवमानना का मामला चलाने के लिए चिदंबरम-पिल्लई के खिलाफ कोर्ट में जनहित याचिका दायर

Mar 03, 2016

पूर्व गृह सचिव जीके पिल्लई ने कहा है कि यूपीए सरकार के गृह मंत्री और कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने इशरत जहां पर हलफनामा बदलवाया और उन्होंने मुझे नजरंदाज किया.

सुप्रीम कोर्ट इशरत जहां मुठभेड़ मामले में गलतबयानी करने और अदालत को गुमराह करने को लेकर पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदम्बरम के खिलाफ अवमानना का मुकदमा चलाने संबंधी याचिका की सुनवाई को मंगलवार को सहमत हो गया था.

पेशे से वकील मनोहर लाल शर्मा ने एक जनहित याचिका दायर करके कोर्ट से आग्रह किया है कि वह स्वत: संज्ञान लेते हुए चिदम्बरम के खिलाफ अवमानना का मुकदमा चलाए.

शर्मा की दलील है कि चिदम्बरम ने इशरत जहां मामले में शपथ पत्र देकर गलतबयानी की और शीर्ष अदालत एवं गुजरात हाईकोर्ट को गुमराह किया. उन्होंने मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित की खंडपीठ के समक्ष मामले का विशेष उल्लेख किया, लेकिन शीर्ष अदालत ने उनसे पूछा कि क्या आपने याचिका दाखिल की है. याचिका को सामान्य प्रक्रिया के तहत सूचीबद्ध होने दीजिए.

सुप्रीम कोर्ट 11 मार्च को इशरत जहां के साथ अन्य लोगों के एनकाउंटर के मामले में सुनवाई करेगा.

दरअसल, कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है. याचिका में कहा गया है कि हलफनामा बदलने के लिए तत्कालीन गृहमंत्री पी चिदंबरम और गृहसचिव जीके पिल्लई के
खिलाफ कोर्ट की अवमानना का मामला चलाया जाए.

याचिका में मांग की गई है कि आरोपी गुजरात पुलिस के अधिकारियों के खिलाफ मामला रद्द किया जाए. इतना ही नहीं यह भी मांग की गई है कि उन आरोपी पुलिस अधिकारियों को पुरस्कार भी दिया जाए. याचिका में कहा गया है कि हेडली के बयान के बाद यह साफ हो गया है कि इशरत लश्कर की आतंकी थी.

हालांकि अपील में पी चिदंबरम और पिल्लई का नाम नहीं है लेकिन यह पूरा मामला इन दोनों से जुड़ा हुआ है. पूरा विवाद पूर्व गृह सचिव जीके पिल्लई के बयान से खड़ा हुआ है. पिल्लई ने हाल ही में दावा किया था कि तत्कालीन गृह मंत्री पी चिदंबरम के कहने पर इशरत से जुड़ा एफ़िडेविट बदल दिया गया था.

 

 

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