भारतीय रेल मे होग हमेशा परिवर्तन- रेल मंत्री

Mar 10, 2016

रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने बुधवार को देश को विश्वास दिलाया कि मौजूदा वैश्विक मंदी और घरेलू चुनौतियों के बावजूद भारतीय रेल के परिवर्तन की यात्रा हकीकत की पटरी पर जारी रहेगी.

प्रभु ने लोकसभा में रेल बजट पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि वर्ष 2016-17 बहुत ही चुनौतीपूर्ण वर्ष है. वैश्विक मंदी, कम माल लदान, सातवें वेतन आयोग की सिफारिश से पड़ने वाले तिहरे असर के बीच पूंजीगत व्यय बढ़ाना और परिचालन अनुपात को नियंत्रित रखना बहुत ही चुनौती भरा काम है लेकिन इसके बावजूद रेलवे इन लक्ष्यों को हासिल करेगी.

उन्होंने बताया कि वर्ष 2015-16 में वैश्विक मंदी के कारण घरेलू उद्योग प्रभावित हुए. सीमेंट, कोयला आदि की कम ढुलाई हुई. एक वैश्विक अध्ययन के मुताबिक वित्त वर्ष 2015-16 में 88 लाख टन माल ढुलाई कम होगी। इस चुनौती से निपटने के लिये रेलवे ने तीन चरणों वाली रणनीति पर काम शुरू किया है. पहली – रेलवे की क्षमता वृद्धि, गैर रेल राजस्व स्रोतों से आय बढ़ाना और योजनागत व्यय बढ़ाना.

प्रभु ने कहा कि इस बार रेलवे का योजनागत व्यय 1.21 लाख करोड़ रुपये रहेगा जो पिछली बार से करीब 20 प्रतिशत अधिक है. उन्होंने बताया कि इस राशि के लिये उन्होंने पूरी जानकारी सदन को दी है कि रेलवे को वित्त मांलय से 34220 करोड़ सकल बजटीय सहायता तथा 10780 करोड़ रुपये रेल संरक्षा कोष के लिये मिलेगा.

इसके अलावा 12750 करोड़ रुपये आंतरिक संसाधन से, राज्यों एवं उपभोक्ताओं की साझेदारी की परियोजनाओं के मद में 18000 करोड़ रुपये, भारतीय जीवनबीमा निगम या अन्य संस्थागत ऋण के माध्यम से 23000 करोड़ रुपये तथा भारतीय रेल वित्त निगम के बॉण्ड के माध्यम से 21700 करोड़ रुपये जुटाये जाएंगे.

रेल मंत्री ने कहा कि रेलवे की लाइनों के बिछाने, विद्युतीकरण करने, राजस्व बढ़ाने के लिये पूर्ण विपणन रणनीति, मालवहन की नीति का अधिक बाजारोन्मुखी बनाने, रेलवे लाइनों के किनारे वेयर हाउस बनाने की योजना है. उन्होंने कहा कि यी परिवहन में भी तेजस एवं हमसफर गाड़यिाँ खर्च से अधिक राजस्व अर्जित करेंगी. इसके अलावा पार्सल नीति को बदला गया है. रेलवे के पास मौजूद आँकड़ों के मौद्रीकरण, जमीन के मौद्रीकरण एवं भंगार बिक्री के माध्यम से पर्याप्त आय अर्जित होगी.

उन्होंने बताया कि ऊर्जा के मद में उठाये गये कदमों से तीन हजार करोड़ रुपये की बचत हुई है. उन्होंने कहा कि इन उपायों से योजनागत व्यय बढ़ाने में मदद मिली है. पूर्वोत्तर तथा जम्मू कश्मीर में विशेष ध्यान दिया गया है. उन्होंने आँकड़ों के साथ बताया कि असम एवं पूर्वोत्तर में 151 प्रतिशत, बिहार में 97 प्रतिशत, ओडिशा में 292 प्रतिशत और तमिलनाडु में 77 प्रतिशत की वृद्धि की गयी है.

उन्होंने कहा कि रेलवे के निर्णय प्रक्रिया में विकेन्द्रीकरण लाये जाने से काम में तेजी आयी है. एक महाप्रबंधक के हवाले से उन्होंने बताया कि पहले जिस ठेके के आवंटन में 500 से अधिक दिन लगते थे, अब उसमें 83 दिन लग रहे हैं. उन्होंने कहा कि कई राज्यों के साथ संयुक्त उपक्रम के करार हुए हैं जिससे रेल परियोजनाओं में उनकी हिस्सेदारी बढ़ने के साथ आर्थिक सहयोग भी बढ़ेगा.

रेलवे के कायाकल्प के लिये ऋण लिये जाने की विपक्ष की आलोचनाओं का उत्तर देते हुए रेल मंत्री ने कहा कि जर्मनी में रेलवे पर 16 अरब यूरो का ऋण है जबकि चीन की रेलवे पर 420 अरब डॉलर का कर्ज है. अमेरिका में रेलवे का आकार 28.4 खरब डॉलर का है और ऋण 44.8 खरब डॉलर का है. इसी प्रकार से जापान की रेलवे पर 32 अरब डॉलर का ऋण है.

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