चाणक्य कह गए हैं, और आप भी मान लीजिए, किसी के सामने भूकर भी मत खोल देना ये चार राज़

May 24, 2017
चाणक्य कह गए हैं, और आप भी मान लीजिए, किसी के सामने भूकर भी मत खोल देना ये चार राज़

कई सालों पहले चाणक्य द्वारा दी कई लोगों को शिक्षाएं आज भी बेहद ज़रूरी साबित होती है। इसके पीछे भी कई तरह की वजह है, मानव मन का गहन अध्ययन के साथ साथ चाणक्य ने मनुष्य के सामाजिक व्यवहार को भी सुक्ष्म दृष्टि से परखा था। चाणक्य द्वारा दी कई शिक्षाएं हमें कटु लग सकती हैं पर इनपर अमल किया जाए तो ये कई परेशानियां हमसे दूर हो जाएंगी। जानिए चार राज़ जिन्हें चाणक्य के अनुसार हर परिस्थिति में गुप्त रखना चाहिए..

आचार्य चाणक्य अपने इस श्लोक में इन चार राजों का जिक्र करते हुए कहते हैं कि- (अर्थनाशं मनस्तापं गृहिणीचरितानि च। नीचवाक्यं चाऽपमानं मतिमान्न प्रकाशयेत।)

हमे कभी भी अर्थ नाश यानी अपने धन की हानी का राज किसी को नहीं बताना चाहिए. अगर हमारी आऱ्थिक स्थिति ठीक नहीं है तो यथा संभव इस राज को राज ही रखने में भलाई है क्योंकि समाज में अक्सर लोग गरीब व्यक्ति को आर्थिक मदद करने से कतराते हैं।

चाणक्य ने दूसरी बात ये बताई है कि हमे अपने मन के संताप यानी अपने दुख किसी को नहीं बताना चाहिए. अक्सर लोग हमारे दुखों का मजाक बनाते हैं. ऐसे में हमे किसी बात का दुख हो और हमें पता चले कि लोग उस दुख का मजाक बना रहें हैं तो हमारा दुख औऱ बढ़ जाता है।

चाणक्य के इस श्लोक के अनुसार जो तीसरा राज है जिसे हर हाल में गुफ्त रखा जाना चाहिए वह है अपनी गृहणी या पत्नी का चरित्र. हमें अपने घर के झगड़े, घरलू क्लेश आदि दूसरों को नहीं बताना चाहिए. इसका समाज में हमारे सम्मान पर नकरात्मक असर पड़ता है।

चाणक्य ने चौथी और अंतिम गुफ्त रखने वाली बात बताते हुए कहा कि यदि कोई नीच व्यक्ति आपका अपमान कर दे तो यह बात किसी को बतई नहीं जानी चाहिए. इस तरह की घटना की जानकारी जब समाज में फैलती है तो लोग हमारा माजाक बनाते हैं जिस वजह से हम्मारे सम्मान को क्षति पहुंचती है।

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