केंद्रीय सूचना आयोग ने कहा, अडाणी समूह की कंपनियों को दिए गए कर्ज का खुलासा नहीं

Nov 28, 2016
केंद्रीय सूचना आयोग ने कहा, अडाणी समूह की कंपनियों को दिए गए कर्ज का खुलासा नहीं

रमेश रणछोड़दास जोशी की याचिका पर केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने कहा है कि उद्योगपति गौतम अडाणी के कंपनियों को दिए गए कर्ज से जुड़े रिकॉर्ड का खुलासा नहीं किया जा सकता है। क्योंकि भारतीय स्टेट बैंक ने संबंधित जानकारी को अमानत के तौर पर हमारे पास रखा है। और इसमें वाणिज्यिक भरोसा जुड़ा हुआ है। जोशी यह जानना चाहते थे कि गौतम अडाणी समूह को किस आधार पर इतनी बड़ी मात्रा में कर्ज दिए गए। इस बारे में उन्होंने सबूत भी मांगे थे। कि क्या कर्ज ऑस्ट्रेलिया में कोयला खादानों से जुड़ा था। सूचना आयुक्त मंजुला पराशर ने अपने आदेश में कहा कि सीपीआईओ अपीलकर्ता को सूचित करता है कि मांगी गयी सूचना वाणिज्यिक सूचना है और तीसरे पक्ष ने भरोसे के आधार पर इसे रखा हुआ है। इसीलिए इसे उपलब्ध नहीं कराया जा सकता है। है और आरटीआई कानून की धारा आठ (1) (डी) (वाणिज्यिक विश्वास) और (ई) (अमानत के तौर पर पड़ी चीज संबंधी प्रावधान) के तहत सूचना देने से इनकार किया जाता है।

सीपीआईओ का दावा, जोशी ने अपने आरटीआई आवेदन में यह जिक्र नहीं किया कि यह मामला बड़े जन हित से जुड़ा है। आरटीआई कानून के तहत वैसी सूचना जिसे खुलासे से छूट प्राप्त है, उसका खुलासा किया जा सकता है बशर्ते उसमें कोई बड़े पैमाने पर जनहित जुड़ा हो।

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