केंद्र ने वीआईपी वाहनों से लाल बत्ती हटाई, कांग्रेस ने प्रतीकात्मक बताया

Apr 20, 2017
केंद्र ने वीआईपी वाहनों से लाल बत्ती हटाई, कांग्रेस ने प्रतीकात्मक बताया

सरकार ने देश में वीआईपी संस्कृति खत्म करने के लिए बुधवार को घोषणा की कि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों समेत देशभर के सभी गणमान्य व्यक्तियों के सरकारी वाहनों पर एक मई से लाल बत्ती नहीं लगाई जा सकेगी। कांग्रेस ने इसे सिर्फ प्रतीकात्मक राजनीति करार दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस निर्णय से मंत्रिमंडल को अवगत कराया। इस घोषणा के तत्काल बाद कई मंत्रियों ने अपने वाहनों से लाल बत्ती हटा दी।

केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कैबिनेट की बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा, “एक मई से देश में किसी को भी आधिकारिक वाहनों पर लाल बत्ती लगाने की अनुमति नहीं होगी। इस मामले में कोई भी अपवाद नहीं होगा।”

जेटली ने कहा, “यह प्रधानमंत्री का निर्णय है। उन्होंने कैबिनेट को इस बारे में सिर्फ सूचित किया।”

मंत्री ने कहा कि हालांकि आपातकालीन और राहत और बचाव कार्यो में शामिल वाहनों, एंबुलेंसों और दकमल गाड़ियों को नीली बत्ती लागने की इजाजत दी जाएगी।

जेटली ने कहा कि सरकार इस मामले में केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम, 1989 में जरूरी बदलाव करेगी।

उन्होंने कहा, “नियम 108 वाहनों पर लाल, सफेद और नीली बत्तियों के प्रयोग को लेकर है। नियम 108-1 (तृतीय) के अनुसार केंद्र और राज्य उन गणमान्य व्यक्तियों के लिए फैसला ले सकते हैं, जो अपने सरकारी वाहनों पर बत्ती का प्रयोग कर सकते हैं। यह एक केंद्रीय नियम है और इसे किसी भी नियम की किताब से हटाया जा रहा है।”

इसका अर्थ है कि अब केंद्र या राज्य में कहीं भी कोई गणमान्य व्यक्ति अपने वाहनों पर बत्ती का प्रयोग नहीं कर पाएगा।

यह पूछे जाने पर कि क्या राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री इस मामले में अपवाद होंगे? जेटली ने कहा कि कोई अपवाद नहीं होगा।

जेटली ने साथ ही कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को फ्लैशर के साथ नीली बत्ती के इस्तेमाल की इजाजत देने वाले कानून में भी बदलाव किया जा रहा है।

जेटली ने कहा, “केवल परिभाषित आपातकालीन सेवाओं को ही फ्लैशर के साथ नीली बत्ती लगाने की इजाजत होगी।”

वित्तमंत्री ने कहा कि इस निर्णय से देश में लोकतांत्रिक मूल्य मजबूत होंगे। उन्होंने कहा कि इसके परिणामस्वरूप अन्य नियमों में जिन बदलावों की जरूरत होगी, उसे भी किया जाएगा।

मंत्रिमंडल की बैठक के तत्काल बाद कई केंद्रीय मंत्रियों और अन्य उच्चाधिकारियों ने अपने वाहनों से लाल बत्तियां हटा दीं।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने संभवत: सबसे पहले लाल बत्ती हटाई।

गडकरी ने कहा, “सरकार का मानना है कि वाहनों पर लाल बत्ती वीआईपी संस्कृति का प्रतीक है और एक लोकतांत्रिक देश में इसके लिए कोई जगह नहीं है। इनकी कोई प्रासंगिकता नहीं है।”

इस निर्णय के चंद घंटों के अंदर ट्विटर पर एवरीवनवीआईपीन्यूइंडिया हैश टैग के साथ वायरल हो गया।

राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए एक ट्वीट किया, “लाल बत्ती का इस्तेमाल समाप्त करना अपेक्षाकृत अधिक जन अनुकूल सरकार बनाने की दिशा में एक स्वागत योग्य और अग्रगामी कदम है।”

कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी ने अपने सरकारी वाहन से लाल बत्ती हटाने के बाद उसकी तस्वीर ट्वीट की और कहा, “अपनी कार से लाल बत्ती हटा दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का निर्णय हमारी इस सोच की दिशा में एक स्वागत योग्य कदम है कि भारत में सभी वीआईपी हैं।”

खेल एवं युवा मामलों के राज्य मंत्री विजय गोयल बगैर लाल बत्ती वाली अपनी कार के वीडियो पोस्ट किए।

महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से कहा कि उन्होंने तत्काल प्रभाव से लाल बत्ती का इस्तेमाल बंद कर दिया।

कांग्रेस ने हालांकि इस निर्णय को प्रतीकात्मक राजनीति और हास्यास्पद बताया है।

कांग्रेस प्रवक्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने कहा, “यह कोई नया नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय ने 10 दिसंबर, 2013 को आदेश दिया था कि किन वाहनों पर बत्तियां लगाई जाएं।”

उन्होंने कहा, “इस निर्णय के तीन वर्षो बाद यदि भाजपा इस पर राजनीति करने की कोशिश कर रही है और नैतिक बनने की कोशिश कर रही है, तो यह हास्यास्पद है।”

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