सुप्रीम कोर्ट से सीबीआई ने की अपील, आडवाणी, जोशी, उमा भारती समेत 13 नेताओं के खिलाफ चले ट्रायल

Apr 06, 2017
सुप्रीम कोर्ट से सीबीआई ने की अपील, आडवाणी, जोशी, उमा भारती समेत 13 नेताओं के खिलाफ चले ट्रायल

बाबरी मस्जिद मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो चुकी है। इस सुनवाई में बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी , मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, कल्याण सिंह समेत 13 नेताओं के लिए काफी अहम् होगी। अब सुप्रीम कोर्ट तय करेगी की इस सभी नेताओं पर आपराधिक साजिश रचने का ट्रायल चलना चाहिए या नही। हालाँकि सीबीआई ने कोर्ट से अपील की है की वो ट्रायल चलाने की अनुमति दे।

सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की है की आडवाणी, जोशी, कल्याण सिंह और उमा भारती समेत 13 नेताओं पर अपराधिक साजिश रचने का आरोप लगाते हुए इन सभी नेताओं के खिलाफ ट्रायल चलाया जाना चाहिए। इसके अलावा सीबीआई ने कोर्ट से कहा की रायबरेली की अदालत में चल रहे केस को भी लखनऊ की स्पेशल कोर्ट के साथ जॉइंट ट्रायल होना चाहिए।

गैरतलब है कि स्टिस पीसी घोष और जस्टिस आरएफ नरीमन की बेंच वाली पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। इससे पहले कोर्ट ने कहा था की हम किसी को टेक्निकल आधार पर राहत देना मंजूर नही कर सकते। कोर्ट की इस टिप्पणी से संकेत मिले थे की अदालत सभी नेताओं पर मुकदमा चलाने की मंजूरी दे सकती है।

सीबीआई और हाजी महबूब अहमद की याचिका पर सुनवाई करते हुए देश की सुप्रीम कोर्ट ने कहा था। की वो इस मामले में सप्लीमेंट्री चार्जशीट की मंजूरी देते है।लेकिन इस मामले की सुनवाई दो जगह होने पर भी सवाल उठाये थे। उन्होंने कहा था की आखिर क्यों न रायबरेली में चल रही सुनवाई को भी लखनऊ शिफ्ट कर दिया जाए। आपको बतादे कि बाबरी मस्जिद का ढांचा गिराने के मामले में मुख्य सुनवाई लखनऊ बेंच में हो रही है। इसके अलावा दूसरा मुकदमा रायबरेली कोर्ट में चल रहा है। वही सुप्रीम कोर्ट के सवाल पर वकीलों का कहना है कि दोनों जगह अलग-अलग आरोपीयो के खिलाफ सुनवाई चल रही है और दोनों ही जगह ट्रायल एडवांस स्टेज में पहुँच चूका है। बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद रायबरेली में ही यूपी के मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह, उमा भारती, मुरली मनोहर जोशी समेत BJP-विहिप के 13 नेताओ पर आपराधिक साजिश रचने (120बी) के तहत केस दर्ज किया गया था।

मालूम हो की, कार सेवको के खिलाफ लखनऊ में केस दर्ज किया गया था। सुनवाई के बाद रायबरेली की लोअर कोर्ट ने सभी 13 नेताओ को बरी कर दिया था। 2010 में इलाहबाद कोर्ट ने भी रायबरेली कोर्ट के आदेश को बरक़रार रखा था। सीबीआई और हाजी महबूब अहमद ने इलाहबाद हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। जो अभी सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित है।

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