कैग की रिपोर्ट में खुलासा : हिमाचल की जेलों में सुरक्षा को लेकर बड़ी लापरवाही

Apr 08, 2017
कैग की रिपोर्ट में खुलासा : हिमाचल की जेलों में सुरक्षा को लेकर बड़ी लापरवाही

हिमाचल प्रदेश की जेलों में कैदियों की भरमार है और पिछले तीन सालों से उनमें क्षमता से दो-122 प्रतिशत अधिक कैदियों को रखा गया है। भारतीय नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रपट में यह बात कही गई है।

रपट में कैदियों की दुर्दशा का भी जिक्र है। इसमें खुलासा किया गया है कि कई कैदी तपेदिक जैसे संक्रामक रोगों से पीड़ित हैं और जेलों में कैदियों के लिए सोने और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं।

कैग की रपट के अनुसार, राज्य की 12 जेलों में 1,732 कैदियों को रखने की व्यवस्था है, लेकिन उनमें एक अप्रैल, 2014, 2015 और 2016 में क्रमश: 2,076, 2137 और 1,962 कैदियों को रखा गया।

राज्य के जेल विभाग ने जेलों की क्षमता बढ़ाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया।

कैदियों की भरमार के कारण जेलों में गंदगी और सुरक्षा-व्यवस्था में कमी पाई गई।

कैग की रपट के अनुसार, विभाग ने कैदियों को शिक्षा और पुनर्वास के अवसर भी उपलब्ध नहीं कराए।

2013-16 के दौरान जेल से रिहा किए गए 786 में से केवल 50 कैदियों को ही कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

स्वास्थ्य जांच सुविधाओं के अभाव में जेलों में विभिन्न रोगों से ग्रस्त 809 में से 456 नए कैदियों को बैरकों में अन्य कैदियों के साथ रखा गया।

रपट के अनुसार, जिन जेलों में यह जांच की गई, उनमें 2013-16 के दौरान 1,116 कैदियों में से केवल छह प्रतिशत ने ही शैक्षणिक योग्यता हासिल की थी।

रपट में जेलों की सुरक्षा में कमी का भी खुलासा किया गया है।

जिन जेलों की जांच की गई, उनमें से किसी में भी प्रतिबंधित सामान लाने से रोकने के लिए स्क्रीनिंग, धातु, विस्फोटक या मोबाइल फोन का पता लगाने की सुविधाएं नहीं पाई गईं।

रपट में पाया गया कि राज्य के बिलासपुर, धर्मशाला, कांदा, मंडी की जेलों में 2009 में लगाए गए 21 सीसीटीवी कैमरों में से मई 2012 से कोई भी कैमरा काम नहीं कर रहा।

कैग के अनुसार, यह जेलों की सुरक्षा में बड़ी चूक है।

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