बेनामी संपत्ति रखने वालों को होगी 7 साल तक की जेल

Aug 16, 2016
राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने हाल में ही बेनामी लेन-देन (प्रतिबंध) (संशोधन) बिल, 2016 को अनुमति दी थी और सरकारी अधिकारियों की ओर से इसे आज नोटिफाई कर दिया गया है।

नई दिल्ली। आय छुपाने या टैक्स चोरी के मकसद से बेनामी संपत्ति खरीदने वालों से जुड़ा सख्त कानून आज सरकार की ओर से नोटिफाई कर दिया गया। रियल इस्टेट सेक्टर में कालेधन पर नजर रखने के उद्देश्य से यह कानून लाया गया है। इसके तहत ऐसे लोगों को 7 साल की जेल और जुर्माने का प्रावधान है, जो टैक्स चोरी के मकसद से बेनामी संपत्ति या कोई लेनदेन करते हैं।

राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने हाल में ही बेनामी लेन-देन (प्रतिबंध) (संशोधन) बिल, 2016 को अनुमति दी थी और सरकारी अधिकारियों की ओर से इसे आज नोटिफाई कर दिया गया है। इस कानून के तहत बेनामी संपत्ति को जब्त करने संबंधी सख्त प्रावधान हैं। साथ ही ऐसे लेनदेन में लिप्त लोगों पर कड़ी पेनल्टी लगाने का भी प्रावधान है।

बेनामी संपत्ति ऐसी संपत्तियों को माना जाएगा जहां कोई प्रॉपर्टी किसी दूसरे व्यक्ति के नाम में है, जबकि उसको खरीदने का विचार और इसके लिए भुगतान किसी दूसरे व्यक्ति ने किया हो।ऐसे मामलों में संपत्ति तत्काल या भविष्य में लाभ उठाने के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उस व्यक्ति के नाम होती है जो इसका भुगतान करता है।

बेनामी लेनदेन (निषेध) संशोधन विधेयक, 2015 पिछले साल 13 मई को वित्त मंत्री अरुण जेटली की ओर से लोक सभा में पेश किया गया ता। इसके बाद इसे वित्त संबंधी स्थायी समिति को भेज दिया गया था। समिति ने 28 अप्रैल को अपनी रिपोर्ट सौपी। 27 जुलाई को लोकसभा ने यह बिल पास किया था और राज्यसभा में इसको 2 अगस्त को मंजूरी मिली।

बेनामी लेनदेन अधिनियम 1988 में संशोधन कर बनाए गए इस नए कानून के मुताबिक कोई भी व्यक्ति जो बेनामी संपत्ति लेनदेन में लिप्त पाया गया उसके कम से कम एक और अधिक से अधिक सात वर्षों का सश्रम कारावास होगा। साथ ही उस संपत्ति के बाजार मूल्य के 25 फीसदी तक जुर्माना लगाया जा सकता है। पुराने कानून के मुताबिक बेनामी संपत्ति लेनदेन के लिए 3 वर्ष के कारावास, या जुर्माना या दोनों का प्रावधान था।

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