7 दिनों में दीजिए बैंक को फ्रॉड की जानकारी, 10 दिनों में वापस आएगा पैसा

Aug 12, 2016
बैंक की लापरवाही या असावधानी की वजह से आपके साथ कोई बैंक फ्रॉड या फ्रजी बैंकिंग लेनदेन हुआ है तो इसके लिए ग्राहक जिम्मेदार नहीं होगा।

नई दिल्ली। बैंक की लापरवाही या असावधानी की वजह से आपके साथ कोई बैंक फ्रॉड या फ्रजी बैंकिंग लेनदेन हुआ है तो इसके लिए ग्राहक जिम्मेदार नहीं होगा। साथ ही इससे होने वाले नुकसान की भरपाई बैंक करेगा। भारतीय रिजर्व बैंक की ओर जारी ड्राफ्ट सर्कुलर में इस बात का जिक्र किया गया है। इस प्रस्ताव के मुताबिक यदि ऐसा कोई भी लेनदेन जिसमें ग्राहक की कोई भागीदारी नहीं है और उसके साथ बैंकिंग लेनदेन में फ्रॉड हुआ है तो इसमें उसकी जिम्मेदारी नहीं होगी और इससे होने वाले नुकसान की भरपाई बैंक करेगा। देश में अनाधिकृत बैंकिंग लेनदेन के केस लगातार बढ़ रहे हैं। आरबीआई की ओर से यह प्रस्ताव इन्ही की समीक्षा के लिए लाया गया है।

ग्राहक की भागीदारी होने पर

यदि कोई गलत बैंकिंग लेनदेन ग्राहक की गलती की वजह से हुआ है तो ग्राहक की भी जबावदेही बनती है और इसके लिए ग्राहक जिम्मेदार होगा। आरबीआई की ओर से अनाधिकृत इलेट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांस्जैक्शन में ग्राहक की भागीदारी सीमित करने संबंधी ड्रॉफ्ट सर्कुलर में इसका जिक्र किया गया है।

4 से 7 दिनों में देनी होगी जानकारी

ड्राफ्ट के मुताबिक ऐसे लेनदेन जहां किसी ग्राहक की भागीदारी स्पष्ट तौर पर सिद्ध नहीं होती है तो ऐसी स्थिति में ग्राहक का अधिकतम दायित्व 5000 रुपए तक का होगा। लेकिन ऐसी स्थिति में यह ध्यान रखना होगा कि ग्राहक को इस बावत अपनी शिकायत बैंक में फ्रॉड होने के 4 से 7 दिनों के अंदर करवानी होगी। यदि ग्राहक 7 दिनों के बाद ऐसी कोई शिकायत बैंक में करता है तो बैंक के बोर्ड से अप्रूव्ड पॉलिसी के हिसाब से इस पर निर्णय लिया जाएगा।

10 दिनों के भीतर क्रेडिट होगा पैसा

ड्राफ्ट के मुताबिक यदि ग्राहक बैंक में अपने साथ हुई गड़बड़ी की शिकायत करता है तो इस गड़बड़ी में जिस रकम का हेरफेर है वह बैंक को 10 दिनों के भीतर ग्राहक के खाते में क्रेडिट करना चाहिए। बैंकिंग फ्रॉड में ग्राहक की भागीदारी है या नहीं इसका निर्णय बैंक ही करेगा। ग्राहक की शिकायत का निपटारा 90 दिनों के भीतर करना होगा। साथ ही यदि यह शिकायत क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड से जुड़ी है तो बैंकों को यह भी तय करना होगा कि इस अवधि का ब्याज ग्राहकों को न लगाया जाए।

यह भी प्रस्तावित है कि बैंकों को अपने ग्राहकों को इलैक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांस्जैक्शन के लिए रजिस्ट्रर कराने के लिए अनिवार्य रूप से कहे। जिससे उन्हे ईमेल या मैसेज के जरिए हर छोटे बड़े लेनदेन की जानकारी मिल सके।

लाइक करें:-
कमेंट करें :-
 

संबंधित ख़बरें

वायरल वीडियो

और पढ़ें >>

मनोरंजन

और पढ़ें >>
और पढ़ें >>