यूरोपीय यूनियन के साथ एफटीए पर करार की उम्मीद बढ़ी

Jul 19, 2016
एफटीए पर आम सहमति बनाने के लिए भारत और यूरोपीय यूनियन के कई दौर की बातचीत हो चुकी है। हालांकि अभी भी कई मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद कायम हैं।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। भारत ने यूरोपीय यूनियन से स्पष्ट कर दिया है कि वो मुक्त व्यापार समझौते के रास्ते में आने वाली अड़चनों से जुड़े सभी मुद्दों पर बात करने को तैयार है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि इन सभी मुद्दों को बातचीत का हिस्सा बनाया जाए ताकि एफटीए को मूर्त रूप में लाने की दिशा में तेजी से बढ़ा जा सके।

बीते सप्ताह दोनों देशों के वार्ताकारों के बीच हुई बैठक में भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वो एफटीए पर चर्चा आगे बढ़ाने को तत्पर है और वार्ता को जल्द से जल्द शुरू किया जाना चाहिए। बैठक में दोनों वार्ताकारों ने उन मुद्दों पर भी बातचीत की जो दोनों पक्षों की तरफ से एफटीए को लेकर रोड़ा बने हुए हैं। साथ ही बातचीत के लिए बकाया बचे मुद्दों को भी वार्ता के नए दौर में शामिल करने पर विचार हुआ।भारत और ईयू के बीच एफटीए को लेकर साल 2007 में वार्ता की शुरुआत हुई थी।

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मुख्य वार्ताकारों के स्तर पर दोनों पक्षों के बीच अब तक 16 दौर की बातचीत हो चुकी है। आखिरी दौर की बातचीत साल 2013 में हुई थी। उसके बाद से दोनों पक्षों के बीच मुख्य वार्ताकारों के स्तर पर बातचीत नहीं हुई है। द्विपक्षीय व्यापार और निवेश समझौते (बीटीआइए) के तहत दोनों पक्ष परस्पर व्यापार में वृद्धि करने के इच्छुक हैं। लेकिन कई मुद्दों पर सहमति नहीं बन पा रही है। भारत कृषि व डेयरी उत्पादों के लिए एक सीमा से अधिक बाजार खोलने के हक में नहीं है। न ही भारत कारों पर आयात शुल्क में कमी कर घरेलू उद्योगों की प्रगति को बाधित करना चाहता है। जबकि यूरोपीय यूनियन बौद्धिक संपदा के मामले में नियम कड़े रखना चाहता है। इस तरह के कुछ मुद्दों पर दोनों पक्षों में सहमति नहीं बन पा रही है।

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