अप्रत्यक्ष कर वसूली में कारोबारियों को राहत

Jul 06, 2016
सीबीईसी ने एक सर्कुलर जारी कर अप्रत्यक्ष कर के दायरे में आने वाले कारोबारियों को राहत दे दी है।

नई दिल्ली, प्रेट्र : अप्रत्यक्ष कर के दायरे में आने वाले कारोबारियों को सरकार ने थोड़ी राहत दे दी है। सीबीईसी ने टैक्स अधिकारियों से कहा है कि वे स्टे आवेदन के लंबित रहने के दौरान कंफ‌र्म्ड डिमांड की रिकवरी के लिए कदम आगे नहीं बढ़ाएं। केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीईसी) ने इस संबंध में सोमवार को एक सर्कुलर जारी किया। टैक्स की कंफ‌र्म्ड डिमांड उसे कहते हैं, जब किसी करदाता के दस्तावेजों की छानबीन के बाद उससे कर की मांग की पुष्टि करते हुए आदेश जारी कर दिया जाता है।

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इस सर्कुलर के मुताबिक, उन मामलों में जहां कमिश्नर (अपील) या सेसटैट के सामने छह अगस्त, 2014 के पहले से स्टे का आवेदन लंबित है, उनसे इस लंबित रहने की अवधि में कोई रिकवरी नहीं की जाएगी। सरकार ने अगस्त, 2014 में कानून में बदलाव करके अपील दाखिल करने के बाद टैक्स डिमांड की 7.5 या 10 फीसद राशि जमा करना जरूरी बनाया गया था। इसके रकम के जमा करने के बाद ही अपील अथॉरिटी किसी स्टे आवेदन पर सुनवाई करेगी।

इसके अलावा उन मामलों में जहां सेस्टैट (अपीलीय ट्रिब्यूनल) या हाई कोर्ट से डिमांड की पुष्टि की गई है, रिकवरी की कार्यवाही आदेश की तारीख से 60 दिन बाद शुरू की जा सकेगी। इसके लिए भी यह शर्त लगाई गई है कि इस दौरान करदाता को अपने आवेदन पर कोई स्टे नहीं मिला होना चाहिए। इस सर्कुलर को जारी करने का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि करदाता को अप्रत्यक्ष करों में वसूली कार्यवाही शुरू करने से पहले अपील करने का पर्याप्त मौका मिल जाए।

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