गेहूं को छोड़ बाकी फसलों की घटी पैदावार

Aug 03, 2016
चावल के बाद प्रमुख फसल गेहूं की पैदावार में संतोषजनक वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2015-16 (जुलाई से जून) में खेती पर सूखे का कुप्रभाव पड़ा था, जिसके चलते पैदावार प्रभावित हुई है।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। लगातार दो सालों के सूखे के चलते चावल, दलहन और मोटे अनाज की पैदावार कमी आई है। हालांकि खाद्यान्न की कुल पैदावार में मामूली बढ़त दर्ज की गई है। कृषि मंत्रालय ने मंगलवार को फसलों की पैदावार का चौथा अग्रिम अनुमान जारी किया है। चावल के बाद प्रमुख फसल गेहूं की पैदावार में संतोषजनक वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2015-16 (जुलाई से जून) में खेती पर सूखे का कुप्रभाव पड़ा था, जिसके चलते पैदावार प्रभावित हुई है।

हालांकि गेहूं की पैदावार पर इसका असर नहीं पड़ा है। कुल खाद्यान्न की पैदावार पिछले साल वर्ष 2014-15 के मुकाबले दो लाख ज्यादा हुई है। 2015-16 में पैदावार 25.22 करोड़ हुई, जबकि 2014-15 में यह 25.20 करोड़ टन थी। दो लाख टन की मामूली वृद्धि हुई है। चावल की पैदावार 10.43 करोड़ टन हुई है, जो पिछले साल के मुकाबले 11.6 लाख टन कम है। लेकिन गेहूं की पैदावार निर्धारित लक्ष्य 9.47 करोड़ टन से कम जरूर रही, लेकिन पिछले साल की पैदावार के मुकाबले 69.7 लाख टन हुई। कुल पैदावार 9.35 करोड़ टन है। मोटे अनाज वाली फसलों पर भी सूखे का असर दिख रहा है, जिससे पैदावार घट गई है।

इसमें लगभग 50 लाख टन की कमी दर्ज की गई है। दलहन फसलों की पैदावार पिछले साल के 1.71 करोड़ टन के मुकाबले घटकर 1.64 करोड़ टन रह गई है। दालों की पैदावार घटने से घरेलू बाजार में दालें पिछले साल के मुकाबले बहुत अधिक मूल्य पर बिक रही हैं। दलहन की उच्चतम पैदावार फसल वर्ष 2013-14 में 1.92 करोड़ टन हुई थी। उसके बाद से उत्पादन में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। तिलहन की पैदावार में भी 22.07 लाख टन की गिरावट का अनुमान है। 2015-16 में पैदावार 2.53 करोड़ टन होगी।

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