बुखारी का बसपा को समर्थन की हवा से समाजवादी खेमे में खलबली

Apr 21, 2016

उत्तर प्रदेश। विधानसभा चुनाव में सपा को समर्थन देकर सत्तारूढ़ कराने वाले जामा मस्जिद के इमाम बुखारी की नाराजगी अखिलेश सरकार को भारी पड़ सकती है। बसपा को बिना शर्त समर्थन देने की बुखारी की तैयारी से समाजवादी खेमे में खलबली मची हुई है। इमाम बुखारी के नुमाइंदों और बसपा प्रमुख मायावती के करीबी नसीमुद्दीन सिद्दीकी के बीच हुई लंबी वार्ता के बाद समर्थन की औपचारिक घोषणा कभी भी हो सकती है।

राज्य में दलित-मुस्लिम गठजोड़ के इस राजनीतिक खेल का सबसे ज्यादा खामियाजा सपा को ही भुगतना पड़ सकता है। इस खतरे को भांपकर सपा प्रमुख ने बुखारी की नाराजगी खत्म कराने की कोशिश की, लेकिन उनसे संपर्क की कोशिशें नाकाम रहीं। सूत्रों के मुताबिक बुखारी ने सपा नेताओं से बात करने से मना कर दिया।

दलित-मुस्लिम गठजोड़ की रणनीति

बसपा नेता नसीमुद्दीन से मुलाकात करने इमाम बुखारी के भाई सैय्यद तारिक बुखारी और अनीस जामई लखनऊ गए थे। यह बैठक लगभग दो घंटे तक चली। बैठक में दलित-मुस्लिम गठजोड़ की रणनीति पर विचार किया गया। इसके तहत इमाम की ओर से मुस्लिम समाज के लिए जारी की जाने वाली अपील और प्रचार के दौरान अपनाई जाने वाली योजनाओं को अंतिम रूप दिया गया।

बैठक में मायावती और इमाम के बीच होने वाली मुलाकात की तिथियों पर भी चर्चा हुई, लेकिन तारीख तय नहीं हो सकी। सूत्रों के अनुसार मार्च के आखिरी सप्ताह में दोनों शीर्ष नेताओं की भेंट हो सकती है। इमाम बुखारी के बदले तेवरों ने सपा नेताओं की परेशानी बढ़ा दी है। वहीं, बसपा नेताओं की कोशिश है कि इमाम की ओर से जितना जल्द हो सके, समर्थन की घोषणा हो जाए ताकि चुनाव में उसका लाभ मिल सके।

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