अरबों की काली कमाई से चेलों को खुश कर अखिलेश के खिलाफ मोर्चा खड़ा करने में सफल रहे शिवपाल

Oct 26, 2016
अरबों की काली कमाई से चेलों को खुश कर अखिलेश के खिलाफ मोर्चा खड़ा करने में सफल रहे शिवपाल
जब पीडब्ल्यूडी और सिंचाई जैसे मालदार महकमों से कमाई रकम से समर्थकों का मोर्चा खड़ा कर जब शिवपाल अखिलेश की घेराबंदी में जुट गए तो भनक मिलते ही पहले अखिलेश ने आर्थिक स्त्रोत की जड़ पर चोट पहुंचानी शुरू कर दी। पहले मलाईदार महकमे छीन लिए और जब चाचा फिर भी नहीं माने तो मंत्रिमंडल से ही बर्खास्त कर दिया। हालांकि जब तक मंत्रिमंडल से शिवपाल निकाले जाते तब तक वे अपने गठजोड़ के दम पर मुलायम सिंह यादव को अखिलेश के खिलाफ उकसाने में सफल हो चुके थे।  पार्टी सूत्र बता रहे हैं कि  शिवपाल ने राज्य मुख्यालय से लेकर जिला इकाई तक के पदों पर अपने आदमी बैठा दिए। सबको खूब कमाई कराई गई। शिवपाल का मकसद रहा कि जब कभी उनकी अखिलेश से मुठभेड़ हो तो समर्थकों की फौज के जरिए शक्ति प्रदर्शन कराकर नेताजी और अखिलेश दोनों पर दबाव  कायम किया जा सके। हालांकि पार्टी में अखिलेश को उगता सूरच मानने के चलते विधायक शिवपाल से ज्यादा नहीं जुड़ सके, मगर प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर अपने लोगों को अहम  पद देकर शिवपाल ने जरूर संगठन में अपनी स्थिति मजबूत कर ली।
 टेंडर मैनेज कर अपने लोगों को पहुंचाते रहे लाभ
समाजवादी पार्टी के एक बड़े नेता ने बताया कि बसपा राज में मायावती ने टेंडर मैनेज कर भारी कमाई का जो फार्मूला निकाला था, सपा सरकार में शिवपाल यादव भी इसी फार्मूला को लोकनिर्माण विभाग और सिंचाई विभाग में अमल करते दिखे। पीडब्ल्यूडी में 20 प्रतिशत तो सिंचाई विभाग में 30 से 40 प्रतिशत कमीशन पर टेंडर मैनेज कर चहेतों को देने का खेल किया जाता रहा। बाकी टेंडर की औपचारिकता ही पूरी होती थी। टेंडर मैनेज करने से दो प्रकार से शिवपाल के हित सधते रहे। एक तो अरबों-खरबों की बैठे-बैठे कमाई होने लगी दूसरे जिसको भी टेंडर दिया जाता वह अपना आदमी हमेशा के लिए हो जाता था। सिंचाई विभाग में सिल्ट सफाई के नाम पर बड़ा घपला होता है। बिना सफाई कराए या निर्धारित से कम खोदाई कर पूरा बजट डकार लेने की शिकायतें आम हैं। जब जांच की नौबत आती है तो पानी छोड़वा दिया जाता है। जिससे पता करना मुश्किल हो जाता है कि नहर में सिल्ट सफाई हुआ था या नहीं। इसका फायदा घोटालेबाज उठाते हैं।
मुलायम के करीबियों को साधकर अखिलेश के खिलाफ भड़काया
शिवपाल ने मुलायम के साथ हमेशा उठने-बैठने वाले लोगों से संबंध प्रगाढ़ किए। जिस अमर सिंह से कभी बहुत अच्छे ताल्लुकात इसलिए नहीं रहे क्योंकि अमर सीधे मुलायम को ही भाव देते थे, उन्हें भी अपने भरोसे में लिया। इसके अलावा सपा में आजम खान के विकल्प के तौर पर उभरते मुस्लिम  चेहरे आशू मलिक सहित कई मुलायम के करीबियों को भरोसे में लिया। इन सबको भी टेंडर के नाम पर खूब लाभ मंत्री रहते शिवपाल ने दिलवाया। बदले में शिवपाल सभी से एक ही काम लिए कि अखिलेश के खिलाफ नेताजी को भड़काओ। पार्टी सूत्र बता रहे हैं कि शिवपाल यादव ने राज्य से लेकर इटावा आदि के जिलास्तरीय पत्रकारों को भी टेंडर देकर अपने पाले में किया। उनसे मनमाफिक खबरें प्रकाशित कराकर नेताजी को उलाहन दिया जाता रहा कि अखिलेश संगठन को ठीक से नहीं चला पा रहे हैं। आखिर इसका नतीजा निकला और मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर शिवपाल को कमान सौंप दी।
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