पर्यावरण संरक्षण के लिए आतिशबाजी पर होगा चैप्टर

Jun 05, 2016

पर्यावरण संरक्षण के लिए आतिशबाजी पर होगा चैप्टर

बिलासपुर(निप्र)। पर्यावरण संरक्षण के लिए बिलासपुर विश्वविद्यालय ने एक और कदम बढ़ाया है। नए सत्र से यूटीडी समेत कॉलेजों में आतिशबाजी पर एक चैप्टर शामिल किया जाएगा। इसमें स्टूडेंट को इसके नुकसान बताते हुए पटाखे नहीं लगाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

शिक्षण सत्र 2016-17 से बिलासपुर विश्वविद्यालय यूटीडी सहित संबद्ध कॉलेजों में आतिशबाजी पर नया चैप्टर शुरू करने जा रहा है। इसमें पटाखों से पर्यावरण को होने वाले नुकसान को लेकर जागरूक किया जाएगा। इसके अलावा अल्ट्रा वायलट किरणों से सुरक्षा व पृथ्वी के गर्म होने के कारण पर भी प्रकाश डाला जाएगा। साथ ही छात्रों को आतिशबाजी की जगह फूलों से स्वागत के लिए प्रेरित करने का प्रयास होगा। अधिकारियों की माने तो विषय विशेषज्ञों से रायशुमारी भी हो चुकी है। विशेषज्ञों ने माना है कि यह प्रभावशाली कदम होगा। इसके अलावा सेमिनार, लेक्चर और प्रेजेंटेशन के जरिए स्कूली बच्चों को भी जागरूक करने की पहल की जा रही है। इस संबंध में विश्वविद्यालय ने खाका भी तैयार कर लिया है। नए सत्र से पहले विद्या परिषद की बैठक में इस प्रस्ताव को रखा जाएगा।

यूजीसी ने किया है प्रोत्साहित

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग(यूजीसी) के सचिव प्रो. जसपाल एस. संधू ने सभी विश्वविद्यालयों को कुछ महीनें पहले पत्र भी लिखा है। इसमें स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर पर्यावरण की पढ़ाई में फायरवर्क्स स्टडीज शामिल करने के निर्देश दिए हैं। पत्र में कहा गया है कि पटाखों से वातावरण को हो रहे नुकसान पर फोरम तैयार कर स्कूलों में चर्चाएं करानी चाहिए। कॉलेजों को इसमें विशेष मदद करनी होगी।

आतिशबाजी पर एक चैप्टर अनिवार्य रूप से शामिल करने तैयारी चल रही है। यूजीसी के आदेशों को ध्यान में रखते हुए पहल की गई है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि पर्यावरण संरक्षण के लिए ऐसे कदम जरूरी हैं। इससे छात्रों को जागरूक करने से मदद मिलेगी।

डॉ.अरुण सिंह

कुलसचिव, बिलासपुर विश्वविद्यालय

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