मेहमान पक्षियों का कानन में बसेरा

Jun 19, 2016

मेहमान पक्षियों का कानन में बसेरा

बिलासपुर। नईदुनिया न्यूज

कानन पेंडारी जू मेहमान पक्षी एशियन ओपनबिल स्टार्क का आगमन हो गया है। इन्होंने जू के अंदर उस जगह पर बसेरा बनाया है जहां पिछले साल डेरा जमाए थे। उनकी संख्या भी इस बार काफी अधिक नजर आ रही है। पर्यटक पूरे समय जू के अंदर इन पक्षियों का दीदार और फोटोग्राफी करते नजर आ रहे हैं।

एशियन ओपनबिल स्टार्क का जू में तीसरे साल आगमन हुआ है। यहां का माहौल उन्हें इतनी पसंद आ रही है कि हर साल उनकी संख्या बढ़ रही है। इस बार उनका आगमन चार दिन बाद हुआ है। पिछले साल 2 जून को ही पहुंच गए थे। स्थानीय भाषा में स्टार्क को घोंघील कहते हैं। क्योंकि खेतों व छोटे उथले तालाबों से घोंघा खाते हैं। यह एक वृहदाकार पक्षी है जो पहाड़ी क्षेत्रों को छोड़कर पूरे भारतीय उप महाद्वीप में पाई जाती है। थाईलैंड, चीन, वियतनाम व रूस जैसे देशों में इन्हें देखा जाता है। इसकी दो प्रजातियां होती है। इनमें एक एशियन ओपनबिल स्टार्क व दूसरा अफ्रीकन ओपनबिल स्टार्क शामिल हैं। एशियन ओपनबिल स्टार्क के ऊपरी एवं निचली चोंच के बीच खाली जगह होने के कारण ही इसे ओपनबिल स्टार्क कहा जाता है। चोंच लहरदार संरचना की होती है जिसे लैमिली कहते हैं, यह लहरदार संरचना एशियन ओपनबिल स्टार्क में नहीं होती है। इन दिनों में पर्यटकों इन पक्षियों को देखने के लिए जबरदस्त उत्साह भी नजर आ रहा है। स्थिति है यह कि पूरे समय पर्यटकों की भीड़ तालाब के आसपास ही नजर आती है। इनकी उड़ान, पेड़ों में झुंड के साथ बैठना जैसी कई चीजें पर्यटकों को प्रभावित कर रही है। जू प्रबंधन भी मेहमानों को लेकर गंभीरता दिखा रहा है। पर्यटकों को स्पष्ट रूप से हिदायत देकर किसी तरह की छेड़छाड़ न करने के लिए कहा जा रहा है।

बरसात का सूचक

संकटग्रस्त ओपनबिल स्टार्क मानसून के साथ ही साथ प्रजनन के लिए आते हैं। इसलिए जानकार व ग्रामीण इन्हें बरसात का सूचक मानते हैं। इनका प्रजनन व प्रवशन काल जून से अक्टूबर तक का होता है। मसलन जून में आकर अक्टूबर में बच्चों के साथ वापसी के लिए उड़ान भरते हैं। अभी घोसले के निर्माण के लिए सूखी टहनियां इकट्ठा करेंगे। जुलाई – अगस्त में अंडे देकर सेने का कार्य करती है। इसके बाद अंडे से चूजे बाहर निकल आते हैं। इनका पोषण सितंबर से अक्टूबर तक करती है।

मांसाहारी पक्षी

कानन पेंडारी जू प्रभारी टीआर जायसवाल का कहना है कि यह पूर्णतः मांसाहारी पक्षी हैं। इनका मुख्य आहार घोंघा, मेंढक, मछली व अन्य छोटे जलीय जीव होते हैं। विश्व में लगभग 20 प्रजातियां हैं। इनमें से 8 प्रजाति भारत में मौजूद हैं। भारत में जम्मू-कश्मीर एवं अन्य बर्फीले स्थानों को छोड़कर देश के सभी मैदानी क्षेत्रों में यह पक्षी पाई जाती है।

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